महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा की जाती है.
रुद्राभिषेक की ऊर्जा शामिल होने से कई गुना फ़ायदा मिलता है
(साकेत धाम ग्वारिघाट)भगवान शिव का अभिषेक सुबह के ब्रह्म मुहूर्त में किया जा सकता है.
ऐसा माना जाता है कि इस समय शरीर में सबसे ज़्यादा ऊर्जा होती है
और इसी ऊर्जा में रुद्राभिषेक की ऊर्जा शामिल होने से कई गुना फ़ायदा मिलता है. 👉महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा की जाती है. इन प्रहरों में भगवान शिव का अभिषेक इस तरह किया जाता है
पहले प्रहर में जल से अभिषेक किया जाता है.
👉दूसरे प्रहर में दही से अभिषेक किया जाता है.
👉तीसरे प्रहर में घी से अभिषेक किया जाता है.
👉चौथे प्रहर में शहद से अभिषेक किया जाता है.
👉महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा की विधि:
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें.
साफ़-सुथरे कपड़े पहनें.
व्रत का संकल्प लें.
शिव जी के मंत्रों का जाप करें.
शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, पंचामृत, गन्ने का रस आदि चढ़ाएं.
भस्म, सफ़ेद चंदन, बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, बेर आदि चढ़ाएं.
घी का दीपक और धूप जलाकर आरती, चालीसा, शिव स्तुति और मंत्र का जाप करें.
अंत में भूल-चूक के लिए माफ़ी मांग लें.
✍️ महाशिवरात्रि चार प्रहर अभिषेक ...
👉 महाशिवरात्रि प्रथम पहर की पूजा मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर पहले पहर की पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष अर्थ और काम प्राप्त होता है। प्रथम पहर की पूजा आमतौर पर संध्याकाल में की जाती है। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक जल की धा...
👉महाशिवरात्रि पर तीसरे पहर की पूजा में भगवान शिव का अभिषेक घी से किया जाता है। घी से अभिषेक करने से व्यक्ति को शारीरिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है। यह पूजा सुबह के समय की जाती है।
👉महाशिवरात्रि पर ऐसे करें चार पहर में भगवान शिव का अभिषेक
महाशिवरात्रि
👉प्रथम पहर की पूजा
मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर पहले पहर की पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष अर्थ और काम प्राप्त होता है। प्रथम पहर की पूजा आमतौर पर संध्याकाल में की जाती है। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक जल की धारा से किया जाता है।
👉महाशिवरात्रि द्वितीया पहर की पूजा
यह पूजा रात के समय की जाती है। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक दही से किया जाता है। इस पहर में पूजा करने से व्यक्ति को धन समृद्धि की प्राप्ति होती है।
👉महाशिवरात्रि तृतीया पहर की पूजा
महाशिवरात्रि पर तीसरे पहर की पूजा में भगवान शिव का अभिषेक घी से किया जाता है। घी से अभिषेक करने से व्यक्ति को शारीरिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है।
👉महाशिवरात्रि चौथे पहर की पूजा
यह पूजा सुबह के समय की जाती है। यह ब्रह्म मुहूर्त में होती है। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक शहर से किया जाता है। इसके बाद जल की धारा से अभिषेक किया जाता है। इस दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जप करते रहना चाहिए।
👉भगवान शिव के मंत्र
1) भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । तस्मै नकाराय नमः शिवाय।
2) रुद्र गायत्री मंत्र : ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
3) 'श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।
4) ओम ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
👉महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक के लिए कई मुहूर्त होते हैं. सुबह, दोपहर, शाम, और रात में जलाभिषेक किया जा सकता है.
साल 2025 में महाशिवरात्रि 26 फ़रवरी को थी. इस दिन जलाभिषेक के लिए ये मुहूर्त थे:
सुबह 6 बजकर 47 मिनट से 9 बजकर 42 मिनट तक
सुबह 11 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक
दोपहर 3 बजकर 25 मिनट से शाम 6 बजकर 8 मिनट तक
रात 8 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 1 मिनट तक
👉महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है. इस दिन शिव मंदिरों में शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं.
महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहर में चार बार पूजा का विधान होता है. इसीलिए चार बार रुद्राभिषेक भी किया जाता है.।
👉महाशिवरात्रि के दिन महादेव का जलाभिषेक का विशेष महत्व है. इस दिन सुबह 6 बजकर 47 बजे से सुबह 9 बजकर 42 बजे तक जल चढ़ाया जा सकता है. इसके बाद मध्यान्ह काल में भी सुबह 11 बजकर 06 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 बजे तक जल चढ़ाया जा सकता है. फिर, दोपहर 3 बजकर 25 बजे से शाम 6 बजकर 08 बजे तक भी जलाभिषेक किया जा सकता है.

