*नवनियुक्त कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने पहला कदम मां नर्मदा के चरणों में रखा*
(जबलपुर के नवनियुक्त कलेक्टर मां नर्मदा की पूजा अर्चना करते )
*आस्था और सादगी से भरा यह पहला कदम मां नर्मदा के चरणों में रखा*
( मनोज विश्वकर्मा विशेष रिपोर्टर)
जबलपुर संवाददाता/ आम तौर पर एक कलेक्टर के कार्यभार संभालने की खबर एक औपचारिक प्रोटोकॉल होती है। लेकिन नवनियुक्त कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बुधवार की सुबह इस परंपरा को बदलकर रख दिया। उनकी पहली पोस्टिंग जबलपुर के कलेक्ट्रेट में नहीं, बल्कि मां नर्मदा के पावन तट गौरीघाट पर हुई। एक आईएएस अधिकारी का आस्था और सादगी से भरा यह पहला कदम पूरी संस्कारधानी में चर्चा का विषय बन गया है।
प्रशासन नहीं, पहले आस्था का पाठ पढ़ाया नर्मदा ने
सुबह की सुनहरी किरणें जब नर्मदा की लहरों पर खेल रही थीं, तब नए कलेक्टर सादे कपड़ों में मां के दरबार में हाथ जोड़े खड़े थे। यहां उनका कोई विशेष प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि स्थानीय पुजारियों का वैदिक मंत्रोच्चारण था। उन्होंने न सिर्फ जिले की समृद्धि और शांति की कामना की, बल्कि आम श्रद्धालुओं से भी रूबरू होकर उनके आशीर्वाद लिए। यह एक ऐसा 'फर्स्ट डे' था, जिसने एक अधिकारी की जनता से जुड़ने की मंशा को बिना शब्दों के ही बता दिया।
'बिना झंडे-बजीजे' का स्वागत, सादगी ने जीता दिल
गौरीघाट से लौटकर जब वे कार्यालय पहुंचे, तो उनकी सादगी ने सबका दिल जीत लिया। बिना किसी भव्य स्वागत समारोह के, बिना फूलों के हारों के, एक साधारण सी कार से पहुंचे राघवेंद्र सिंह ने साफ संदेश दिया कि उनकी प्राथमिकता प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि काम है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस सरल अंदाज़ की खूब सराहना की।
जनता से वादा: "अब दफ्तर आपके दरवाजे तक पहुंचेगा"
कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में नए कलेक्टर ने अपनी रणनीति साझा की। उन्होंने कहा, "प्रशासन का लक्ष्य दफ्तर तक सीमित नहीं होगा। हम आपके दरवाजे तक पहुंचेंगे।" उनकी प्राथमिकताओं की सूची में पारदर्शिता, जनसुनवाई को तवज्जो और ग्रामीण इलाकों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करना शीर्ष पर है।
एक नई शुरुआत का एहसास
राघवेंद्र सिंह के पूर्ववर्ती दीपक सक्सेना ने जमीन पर कई योजनाओं को उतारा, जिन्हें आगे बढ़ाने का वादा नए कलेक्टर ने किया है। लेकिन जिस तरह से उन्होंने अपने कार्यकाल की शुरुआत की है, उससे जबलपुर के लोगों को एक नई उम्मीद दिखाई दे रही है। लगता है मां नर्मदा के आशीर्वाद और एक सादगीपसंद अधिकारी के नेतृत्व में संस्कारधानी के विकास की एक नई, जन-केंद्रित कहानी लिखी जाएगी।
