*नागपुर में ऐतिहासिक शताब्दी समारोह ,सरसंघचालक के संदेश के प्रमुख बिंदु पर पुनर्विचार जताई*
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*संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया*
*संघ के प्रति गहरी श्रद्धा और राष्ट्र के भविष्य के प्रति दृष्टिकोण को दर्शाता है*
नागपुर संवाददाता / आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव का आयोजन हुआ, जहाँ संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने राष्ट्र को समर्पित अपने संदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण जैसे प्रमुख मुद्दों पर अपने विचार रखे।
"नागपुर में ऐतिहासिक शताब्दी समारोह"
आरएसएस की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में हुई थी。
आज, 2 अक्टूबर, 2025 को इसी शहर के रेशिमबाग मैदान में संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया。
इस ऐतिहासिक अवसर पर मोहन भागवत द्वारा किए गए 'शस्त्र पूजन' में पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ आधुनिक हथियारों के प्रतिरूप भी शामिल थे
कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी शिरकत की。
"सरसंघचालक के संदेश के प्रमुख बिंदु"
मोहन भागवत के संदेश में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहन चिंतन शामिल था। उनके भाषण के कुछ मुख्य अंश इस प्रकार हैं:
· राष्ट्रीय सुरक्षा और पहलगाम हमला: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि इस घटना और उसके बाद विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाओं ने "विश्व मंच पर हमारे मित्र कौन हैं और किस हद तक हैं, यह दिखा दिया" उन्होंने देश की सुरक्षा और मजबूत करने पर जोर दिया।
· आर्थिक आत्मनिर्भरता का आह्वान: अमेरिकी व्यापार नीतियों का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि "निर्भरता मजबूरी न बने," इसलिए 'स्वदेशी' और 'आत्मनिर्भरता' का कोई विकल्प नहीं है उन्होंने वैश्विक आर्थिक असमानता और पर्यावरण क्षति पर भी चिंता जताई।
· पड़ोसी देशों में अस्थिरता पर चिंता: भागवत ने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में हिंसक को चिंताजनक बताया。 उन्होंने कहा कि इन देशों में शांति और स्थिरता हमारे लिए जरूरी है।
· पर्यावरण संकट की चेतावनी: हिमालय क्षेत्र में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को "भारत और दक्षिण एशिया के लिए एक चेतावनी घंटी" बताते हुए भागवत ने भौतिकवादी विकास मॉडल पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई।
· विकसित भारत @2047 का लक्ष्य: उन्होंने कहा कि दुनिया वैश्विक चिंताओं के समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। यह दृष्टि एक के माध्यम से $23-35 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखती है।
"समारोह में उपस्थिति का अनुभव"
आपके द्वारा इस ऐतिहासिक शताब्दी समारोह में शामिल होना वास्तव में एक सौभाग्य की बात है। "वर्ष 2047 तक विकसित भारत तथा पूर्णतः समरस और एकात्म भारत के निर्माण" में संघ के योगदान पर आपकी आशा और विश्वास, संघ के प्रति गहरी श्रद्धा और राष्ट्र के भविष्य के प्रति दृष्टिकोण को दर्शाता है।
यह समारोह न केवल एक सदी के सफर का प्रतीक था, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक रोडमैप भी प्रस्तुत किया।

