*स्कूल वाहनों का चैंकिग अभियान,40 स्कूली वाहनों के चालकों के विरूद्ध चालानी कार्यवाही*
*पुलिस ने चेतावनी दी चालकों को जुर्माने के साथ निलंबन तक की कार्रवाई होगी*
चीफ एडिटर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर। शहर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर यातायात पुलिस ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक श्री सम्पत उपाध्याय (भा.पु.से.) के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान में 40 स्कूल वैन/बसों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई और कुल 70,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया। यह अभियान मुख्य रूप से स्कूल परिसरों के बाहर केंद्रित रहा, जहां बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की जांच की गई।
कहाँ और कैसे हुई कार्रवाई?
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) अखिलेश तिवारी के मार्गदर्शन में उप पुलिस अधीक्षक संतोष शुक्ला और बैजनाथ प्रजापति के नेतृत्व में विशेष टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने सेंट्रल स्कूल नंबर 1 और 2, सेंट अलायसिस स्कूल और सेंट जोसेफ स्कूल के बाहर अचानक निरीक्षण किया। सुबह स्कूल शुरू होने और दोपहर छुट्टी के समय यह चेकिंग की गई, ताकि बच्चों को वाहनों में चढ़ते-उतरते देखा जा सके।
किन-किन बातों की हुई जांच?
यातायात पुलिस ने स्कूल वाहनों की जांच सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और मोटर वाहन अधिनियम के सख्त प्रावधानों के तहत की। जांच में इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया:
· क्या वाहन में स्कूल बस/वैन का स्पष्ट नामांकन है?
· क्या फर्स्ट एड बॉक्स, फायर एक्सटिंग्विशर और स्पीड गवर्नर लगे हैं?
· क्या वाहन में बच्चों के बैठने की क्षमता निर्धारित संख्या से अधिक तो नहीं?
· क्या चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन के कागजात पूरे हैं?
· क्या वाहन में ग्रिल/जाली और आपातकालीन दरवाजा की व्यवस्था है?
जांच में पाया गया कि कई वाहनों में ये बुनियादी सुरक्षा इंतजाम नदारद थे। ऐसे वाहनों को मौके पर ही जब्त कर थाना सिविल लाइन में खड़ा कर दिया गया।
क्या हुआ उल्लंघन और क्या सजा?
कार्रवाई के दौरान 40 से अधिक वाहनों के खिलाफ चालान किए गए। इनमें ज्यादातर वैनें ऐसी थीं, जिनमें बच्चों की संख्या निर्धारित सीट से अधिक थी, या जिनमें सुरक्षा उपकरण नहीं थे। पुलिस ने नियमों के तहत इन पर कुल 70,000 रुपये का समन शुल्क (जुर्माना) लगाया। सबसे ज्यादा जुर्माना उन वाहनों पर लगाया गया, जिनमें स्पीड गवर्नर नहीं था या कागजात अधूरे मिले।
पुलिस ने दी ये सख्त हिदायतें
कार्रवाई के दौरान यातायात पुलिस ने स्कूल संचालकों और वाहन चालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि:
· बच्चों को स्कूल परिसर के अंदर ही चढ़ाना और उतारना सुनिश्चित करें।
· सड़क किनारे या भीड़-भाड़ वाली जगह पर बच्चों को न उतारें।
· सुप्रीम कोर्ट की सभी गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन करें।
· किसी भी स्थिति में बच्चों की संख्या क्षमता से अधिक न हो।
· वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस हर समय वैध रखें।
पुलिस ने चेतावनी दी कि अगर किसी भी वाहन में दोबारा कोई कमी पाई गई, तो उसके खिलाफ जुर्माने के साथ निलंबन तक की कार्रवाई होगी।
अभिभावकों से विशेष अपील
इस मौके पर यातायात पुलिस ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को ई-रिक्शा और ऑटो में न भेजें, क्योंकि ये वाहन स्कूली बच्चों के परिवहन के लिए कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं। पुलिस ने कहा कि इन वाहनों में न तो सुरक्षा उपकरण होते हैं और न ही बच्चों के लिए कोई विशेष व्यवस्था। साथ ही, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को निर्देश दिया गया कि वे अपने सभी कागजात पूरे करें और यूनिफॉर्म पहनकर ही परिवहन करें। अन्यथा उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।
क्या रही टीम में शामिल अधिकारी
इस पूरे अभियान में निरीक्षक श्रीमती इंद्रा ठाकुर, रक्षित निरीक्षक मनीष पयासी, वीरेंद्र आरक, सूबेदार राहुल सिंह और यातायात पुलिस का पूरा स्टाफ मौजूद रहा। सभी ने मिलकर इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
पुलिस का स्पष्ट संदेश: बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं
यातायात पुलिस ने साफ कहा है कि यह अभियान केवल एक बार का नहीं है, बल्कि आगे भी नियमित रूप से इस तरह की चेकिंग जारी रहेगी। पुलिस का कहना है कि बच्चों की जान अनमोल है और उनकी सुरक्षा को लेकर कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अभिभावकों से अनुरोध है कि वे खुद भी नजर रखें कि उनके बच्चे किस वाहन में स्कूल जा रहे हैं और अगर कोई संदिग्ध बात लगे तो तुरंत यातायात पुलिस को सूचित करें।