*सिस्टम पर भारी ‘अवैध पैकारी’ विधायक को भी आईं जी और एसपी से लगानी पड़े गुहार*
*शराब सिंडिकेट पर किसका संरक्षण ,सत्ता का पावर भी पड़ा फीका*
विशेष संवाददाता क्राइम भास्कर न्यूज कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में अवैध शराब के कारोबार (पैकारी) ने अब एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जहां आम जनता ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी पार्टी के विधायक को भी पुलिस महानिदेशक (iG) और पुलिस अधीक्षक (SP) से गुहार लगानी पड़ रही है। बड़वारा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने हाल ही में कटनी के पुलिस अधीक्षक को एक पत्र लिखकर अपने क्षेत्र में फैली अवैध शराब की समस्या से अवगत कराया है। यह *पत्र जिले की कानून-व्यवस्था और आबकारी महकमे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है
*शराब सिंडिकेट पर सत्ता का पावर भी पड़ा फीका
राजनीतिक गलियारों और आम चर्चाओं में अब यह सवाल तेजी से गूंज रहा है"यदि एक सत्तारूढ़ दल के विधायक की अनुशंसा या मौखिक निर्देश पर पुलिस और आबकारी विभाग अवैध पैकारियों पर ताला नहीं लगा पा रहे, तो आखिर इन पैकारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है?" विधायक का शासकीय लेटरहेड पर पत्र लिखना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर थाना व चौकी पुलिस अवैध शराब नेटवर्क के सामने पंगु बनी हुई है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी है।
इन आधा दर्जन से अधिक इलाकों में समानांतर 'सिंडिकेट'
विधायक द्वारा पत्र में स्लीमनाबाद, तेवरी, एनकेजे, निवार, ढीमरखेड़ा, पानउमरिया और सिलौंडी जैसे वृहद क्षेत्रों का जिक्र किया गया है। ये वे इलाके हैं जहां गांव-गांव तक अवैध पैकारियों का जाल फैला हुआ है। शाम ढलते ही शराब के अवैध ठिकानों पर जमावड़ा और आए दिन होने वाले विवादों ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है।
सिर्फ पत्राचार या होगा कोई बड़ा एक्शन?
विधायक ने पत्र की प्रतिलिपि जबलपुर रेंज के आईजी (IG) , अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के साथ आबकारी विभाग को भी भेजी है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस 'पत्र' के बाद पुलिस महकमा जागेगा और अभियान चलाकर शराब सिंडिकेट की कमर तोड़ेगा, या फिर यह पत्र भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा? हाल ही में कटनी पुलिस ने कोतवाली क्षेत्र से 10 पेटी (500 पाव) अवैध शराब बरामद की है, जिसकी कीमत करीब 55 हजार रुपये बताई गई है। इस मामले में एक आरोपी के खुलासे के बाद 'मामा' उर्फ मनोज शिवहरे जैसे नाम सामने आए हैं, जो फरार चल रहा है। यह घटना साबित करती है कि जिले में अवैध शराब का नेटवर्क कितना गहरा है।
आगे की राह
अगर विधायक के पत्र लिखने के बाद भी ज़मीन पर हालात नहीं बदलते, तो यह साबित हो जाएगा कि कटनी में अवैध पैकारी चलाने वाले गिरोह का रसूख और ताकत शासन-प्रशासन के इकबाल से कहीं ज्यादा बड़ी हो चुकी है। अब देखना यह होगा कि पुलिस और आबकारी विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और क्या वाकई में इस सिंडिकेट के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हो पाती है।
