प्रयागराज में विशेष घास की बनाई घास की टकरिया विशेष परंपरा है - Bhaskar Crime

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प्रयागराज में विशेष घास की बनाई घास की टकरिया विशेष परंपरा है

प्रयागराज में विशेष घास की बनाई घास की टकरिया विशेष परंपरा है

मूँज व कास एक प्रकार की जंगली घास है विगत 60 से 70 वर्षों से चलन में है

घास के बाहरी आवरण को कुंडली की आकृति में मोड़ कर बनाया जाता है 


प्रयागराज के मूंज को चिन्हित वन जिला वन प्रोडक्ट के रूप में किया गया 

उत्तर प्रदेश संवादाता / प्रयागराज में विशेष अवसरों पर दैनिक प्रयोग के लिए टोकरियाँ (डलिया) बनाने की परंपरा रही है । इन टोकरियों को मूँज कहलाने वाली घास के बाहरी आवरण को कुंडली की आकृति में मोड़ कर बनाया जाता है नैनी ग्राम मूँज का मुख्य उत्पादक है । मूँज व कास एक प्रकार की जंगली घास है जो प्रयागराज में नदी के किनारों पर विशाल क्षेत्रों में बहुतायत से पायी जाती है

यह हस्त कला अधिकांशत महिलाओं द्वारा ही संपादित की जाती है । मूँज घास का बाहरी आवरण है जिसे छील कर गाँठों में परिवर्तित कर लिया जाता है यह कला विगत 60 से 70 वर्षों से चलन में है । इस घास को शीतकाल में काट लिया जाता है और इसके छिलकों को कुछ दिनों के लिए ओस में छोड़ दिया जाता है जिससे उनका रंग कुछ हल्का हो जाय आजकल कुछ छिलकों को चटक रंगों में रंगा जाता है तथा आपस में उन्हे बांधने के लिए प्लास्टिक की पट्टियों, टिनसेल या कपड़े का सहारा लिया जाता है 

बीच बीच में रंगीन घास लगा कर और टोकरी बनाने की कला को और भी निखारा जाता है । मूँज से बनी टोकरियां (डलिया) दैनिक प्रयोग के लिए भी बहुत उपयुक्त होती है । प्राकृतिक वस्तुओं से बना यह उत्पाद खाद्य सामग्री रखने (विशेषकर रोटियाँ) व दीवालों पर सौंदर्यीकरण हेतु भी बहुत उपयोगी है  यह उत्पाद बहुत सामान्य, आकर्षक व पर्यावर्णीय दृष्टि से सुरक्षित भी है