*पुलिस लाईन बनी 'सेवा एवं सशक्तिकरण' का हब*
*आईजी ने कल्याणकारी योजनाओं का किया निरीक्षण*
*इन पहलों से स्पष्ट है कि जबलपुर पुलिस का लक्ष्य अब सिर्फ अपने बल के कल्याण तक ही सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज के एक वर्ग को सशक्त बनाने का है, जो एक सराहनीय और अनुकरणीय कदम है*
जबलपुर, संवाददाता/ आज पुलिस की भूमिका अब सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। यह बात जबलपुर पुलिस लाइन में चल रही अनूठी पहलों ने एक बार फिर साबित कर दिखाया है। यहाँ अब पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी 'सेवा एवं सशक्तिकरण' के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं।
पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) जबलपुर जोन, प्रमोद वर्मा ने आज पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय की उपस्थिति में इन्हीं कल्याणकारी योजनाओं का गहन निरीक्षण किया और भविष्य की और भी व्यापक योजनाओं का मार्गदर्शन दिया।
यहाँ हैं वो अनोखी पहलें जो बदल रही हैं जिंदगियाँ:
1. एस.पी. की पाठशाला: सपनों को उड़ान देती कक्षाएँ पुलिस लाइन मेंपुलिस परिवारों और गरीब तबके के उन मेधावी बच्चों के लिए चलाई जा रही है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इस निःशुल्क कोचिंग केंद्र ने कई सफलता की कहानियाँ लिखी हैं, जहाँ से तैयारी करने वाले कई अभ्यर्थियों का चयन विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं में हो चुका है।
2. दिशा लर्निंग सेंटर: तकनीक और ज्ञान का संगम यह केंद्र पुलिस परिवार केबच्चों के लिए एक डिजिटल ज्ञानकोश बन गया है। यहाँ सिर्फ किताबें ही नहीं, बल्कि कोचिंग संस्थानों के विशेष नोट्स भी उपलब्ध हैं। साथ ही, कम्प्यूटर और इंटरनेट की सुविधा से लैस इस सेंटर पर बच्चे MS Office सीखने, ऑनलाइन रिसर्च करने और टाइपिंग सीखने जैसे आवश्यक डिजिटल कौशल भी विकसित कर रहे हैं।
3. धृति: महिलाओं के हुनर को मिल रहा है नया मंच यह पहल पुलिस परिवार कीमहिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए शुरू की गई है। 'धृति' के तहत महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनियाँ लगाकर और उन्हें बेचकर उन्हें एक नया बाजार और पहचान दिलाई जा रही है।
4. सेंट्रल पुलिस कैंटीन: किफायती दरों पर घरेलू जरूरतें आर्मीकैंटीन की तर्ज पर चलने वाली इस कैंटीन में जिला पुलिस, जी.आर.पी., एसएएफ, होमगार्ड सहित सभी इकाइयों के कर्मियों को उनकी हर छोटी-बड़ी घरेलू जरूरत का सामान किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जाता है।
भविष्य की योजनाओं को दिया गया हरी झंडी
आईजी वर्मा ने इन पहलों की सराहना करते हुए भविष्य की और भी प्रगतिशील योजनाओं के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस परिवार की महिलाओं और बच्चों को और अधिक तकनीकी ज्ञान एवं कौशल विकास प्रशिक्षण देकर सक्षम बनाया जाए। साथ ही, गृहणियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था और महिला कर्मचारियों के छोटे बच्चों की देखभाल के लिए 'पालनागृह' (क्रेच) जैसी सुविधा शुरू करने पर जोर दिया।