*पुलिस का कॉम्बिंग अभियान में एक रात में सैकड़ों वारंट पकड़े गए*
*फिर भी बड़े अपराधों पर अंकुश चुनौतीपूर्ण पुलिस के लिए बनी है*
*मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने हाल ही में पुलिस मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों को रात्रि में गश्त करने के निर्देश दिए थे*
(पुलिस द्वारा की गई कॉम्बिंग गश्त में 155 वारंट तामील करने का कोई सीधा रिकॉर्ड नहीं मिला है, लेकिन इसी तरह की हाल की कार्रवाइयों के विस्तार में आंकडे उपलब्ध है)
भोपाल, 23 नवंबर 2025: प्रदेश भर में हर शनिवार को रात के समय पुलिस के द्वारा चलाए जा रहे कांबिंग अभियान के तहत भोपाल पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए सैकड़ों वारंट तामील किए हैं। हालांकि, इन कार्रवाइयों के बावजूद प्रदेश के हर शहर में हत्या, लूट, डकैती और तस्करी जैसे गंभीर अपराध जारी हैं, जिससे पुलिस की रणनीति की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं
क्या है कॉम्बिंग ऑपरेशन
कॉम्बिंग गश्त पुलिस की एक विशेष एवं अहम अभियान है, जो मुख्य रूप से रात्रि में चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य फरार स्थाई, गिरफ्तारी एवं जमानती वारंटों की धरपकड़, गुंडे-बदमाशों की निगरानी और सर्चिंग करना है। इस तरह के अचानक ऑपरेशन से अपराधियों के बीच पुलिस का खौफ बना रहे, इसका भी प्रयास किया जाता है।
भोपाल पुलिस की कार्रवाई के ताजा आंकड़े
हाल के महीनों में भोपाल पुलिस ने कई बड़े कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए हैं, जिनमें सैकड़ों वारंटी पकड़े गए। हालांकि आपके द्वारा बताए गए 155 वारंट के मुकाबले, सार्वजनिक रिकॉर्ड में कुछ अलग आंकड़े देखने को मिले हैं:
तारीख कैद वारंट स्थाई वारंट कुल गिरफ्तार/वारंट तामील
15-16 जून, 2024 313 354 667
22-23 जून, 2024 (राज्यव्यापी) 5,000+ 2,500+ 8,000 (लगभग)
एक अन्य शनिवार (हालिया) 398 529 927 (कुल बदमाश गिरफ्तार)
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पुलिस लगातार छोटे-मोटे अपराधियों को पकड़ने में सक्रिय है। पिछले ऑपरेशन में 16वीं कॉम्बिंग गश्त में अब तक कुल 9,335 बदमाश गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
कार्रवाई की रणनीति इन ऑपरेशनों को बहुत ही सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया जाता है:
· विस्तृत योजना: रात 11 बजे के आसपास शुरू होकर सुबह 5 बजे तक चलने वाली इन गश्तों में शहर को अलग-अलग जोन में बांट दिया जाता है।
· बड़ी संख्या में तैनाती: एक ही गश्त में 800 से 1,000 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।
· शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी: ऑपरेशन की मॉनिटरिंग खुद डीआईजी, एसपी और पुलिस कमिश्नर जैसे वरिष्ठ अधिकारी करते हैं ताकि कार्रवाई प्रभावी रहे।
एक ओर तो पुलिस द्वारा हजारों की संख्या में गिरफ्तारियां हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में बड़े और संगठित अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे। इससे संकेत मिलता है कि हो सकता है व्यवस्था में कोई कमी हो, जिसके चलते केवल छोटे अपराधी ही पकड़ में आ रहे हों, जबकि बड़े अपराधी और उनके नेटवर्क सुरक्षित बने हुए हों
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में पुलिस मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों को रात्रि गश्त सहित निरंतर निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। यह सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या केवल गश्त और छोटे अपराधियों की गिरफ्तारी अपराधों की जड़ तक पहुंचने के लिए काफी है? विशेषज्ञों का मानना है कि खुफिया तंत्र को मजबूत करने और आर्थिक अपराधों व तस्करी के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की दरकार है।