हिंदू संगठनों ने विवादित पुस्तकों और मॉब लिंचिंग के मामले में कठोर कार्रवाई की मांग की
जबलपुर संवाददाता/ आज जय महाकाल संघ अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल के नेतृत्व में कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में हिंदू धर्म सेना, हिन्दू महाशक्ति संघ और सनातन एकता मंच जैसे संगठन भी शामिल थे।
संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कन्हैया तिवारी ने अति पुलिस अधीक्षक आयुष गुप्ता के नाम सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मुख्य मांगें रखीं:
1. विवादित पुस्तकों पर कार्रवाई: आरोप लगाया गया कि मानस भवन, जबलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लगे बुक स्टॉल पर भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी के बारे में "अनर्गल, अश्लील और भड़काऊ" बातें लिखी पुस्तकें बेची जा रही थीं। इसे हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करने और समाज में फूट डालने की साजिश बताया गया। मांग की गई कि ऐसे प्रकाशक, लेखक और स्टॉल लगाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
2. दलित विभाजन के आरोप: आरोप लगाया गया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर और पुराणों के गलत उल्लेख के जरिए SC, ST, OBC समुदायों के बीच विद्वेष फैलाने का काम किया जा रहा है। मांग की गई कि इसके पीछे की "राष्ट्र विरोधी" और "सनातन धर्म विरोधी" साजिश की जांच की जाए।
3. मॉब लिंचिंग का मामला दर्ज करने की मांग: दावा किया गया कि विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ "मॉब लिंचिंग" की गई और उन्हें गंभीर चोटें आईं। आरोप लगाया गया कि यदि पुलिस बीच में नहीं आती तो उनकी जान ले ली गई होती। इस मामले में दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई।
चेतावनी: संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो समस्त हिंदू समाज द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा।
पुलिस की प्रतिक्रिया: प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया है कि मामले में कार्रवाई की जा रही है और अन्य बिंदुओं पर भी जांच कर कार्रवाई होगी।
इस आंदोलन में संगठन के कन्हैया तिवारी, योगेश अग्रवाल, अनिल दुबे सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
· यह खबर पूरी तरह से एक पक्ष (हिंदू संगठनों) के बयानों और आरोपों पर आधारित है।
· पुलिस या प्रशासन की ओर से इन आरोपों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
· विवादित पुस्तकों की सामग्री या मॉब लिंचिंग के दूसरे पक्ष का कोई ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
· एक संतुलित रिपोर्ट के लिए पुलिस और आरोपों के दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया आवश्यक होगी।