चार नई श्रम संहिताओं के विरोध में देशभर में काला दिवस मनाया - Bhaskar Crime

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चार नई श्रम संहिताओं के विरोध में देशभर में काला दिवस मनाया

*चार नई श्रम संहिताओं के विरोध में देशभर में काला दिवस मनाया*

*“श्रमिकों का हित नहीं, उत्पीड़न होगा” मप्र विद्युत कर्मचारी संघ ने किया हुंकार*

श्रमिक विरोधी कानूनों के खिलाफ एकजुटता: देश के सभी श्रम संगठनों ने चार नई श्रम संहिताओं को श्रम-विरोधी और नियोक्ता-समर्थक बताते हुए आज काला दिवस मनाकर कड़ा विरोध प्रदर्शित किया

· औपनिवेशिक जैसी स्थिति की आशंका: मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि ये संहिताएं श्रमिकों को फिर से औपनिवेशिक काल जैसी शोषणकारी परिस्थितियों में धकेलने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में यूनियन बनाना कठिन, पंजीकरण मुश्किल और निरस्तीकरण आसान कर दिया गया है।

· प्रमुख मांगें:

  1. बिजली कंपनियों का निजीकरण बंद किया जाए।

  2. संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को तत्काल नियमित किया जाए।

  3. पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू की जाए तथा सभी पेंशनभोगियों की पेंशन की गारंटी सरकार सुनिश्चित करे।

  4. चारों श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए।

· कानूनों में खामियां: फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को सामान्य बनाना, सामाजिक सुरक्षा कानूनों को कमजोर करना, सुरक्षा मानकों से समझौता, और न्यूनतम वेतन कानून को कमजोर करने जैसे प्रावधानों पर गहरी चिंता जताई गई।

· विद्युत क्षेत्र की विशेष समस्या: फेडरेशन ने कहा कि 15 वर्षों से अधिक समय से संविदा पर कार्यरत कर्मचारी नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राज्य बंटवारे की धारा 49 के कारण हजारों पेंशनभोगी आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं, जिसे समाप्त किया जाना आवश्यक है।

· व्यापक समर्थन: विरोध प्रदर्शन में यू के पाठक, दिनेश दुबे, अनूप वर्मा, उमाशंकर दुबे, संजय सिंह सहित फेडरेशन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं पदाधिकारी शामिल हुए।

संक्षिप्त सारांश:

देश के श्रमिक संगठनों ने नई श्रम संहिताओं को "काला कानून" बताते हुए आज विरोध प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने इन कानूनों को उद्योगपतियों के पक्ष में बताते हुए इन्हें वापस लेने, बिजली कंपनियों का निजीकरण रोकने, संविदा कर्मियों को नियमित करने और पुरानी पेंशन बहाल करने सहित छह प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं।