1 जून से पेट्रोल पंप हड़ताल: डीलरों ने सीएम को सौंपी चेतावनी, कई पंप हुए ड्राई
विशेष संवाददाता जयपुर। राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर संकट गहराता दिख रहा है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन (RPDA) ने 1 जून से प्रदेशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है। डीलरों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर अपनी 10 सूत्री मांगें रखी हैं। यदि समय रहते बैठक नहीं हुई और मांगें नहीं मानी गईं, तो प्रदेशभर के पेट्रोल पंप बंद रहेंगे और धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे।
डीलरों का आरोप: बातचीत को नजरअंदाज कर रही सरकार और कंपनियां
एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी ने कहा कि डीलरों की समस्याओं का लंबे समय से कोई समाधान नहीं निकल रहा है। "न तो सरकार और न ही तेल कंपनियां बातचीत को गंभीरता से ले रही हैं। फोन और ई-मेल का कोई जवाब नहीं मिल रहा," भाटी ने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 1 जून तक बैठक नहीं हुई तो सभी पंप संचालक आंदोलन पर उतरेंगे।
सप्लाई पर कटौती, रोजाना कई पंप हो रहे ड्राई
डीलरों का कहना है कि तेल कंपनियों ने एकतरफा तरीके से डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति सीमा तय कर दी है:
· इंडियन ऑयल ने प्रतिदिन की बिक्री पर ऊपरी सीमा लगा दी है।
· भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी सप्लाई में कटौती की है।
· निर्धारित सीमा से अधिक बिक्री पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगाए जा रहे हैं।
इसका नतीजा यह है कि प्रदेश के कई पेट्रोल पंप रोजाना सूखने (ड्राई) लगे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में ईंधन की किल्लत गहरा रही है।
कानून के उल्लंघन और फ्लोमीटर की मांग
डीलरों ने तेल कंपनियों पर नियंत्रण अधिनियम-2000 और MSHSD अधिनियम-2005 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है:
· पेट्रोल पंप और तेल डिपो पर फ्लोमीटर (प्रवाह मापी यंत्र) लगाया जाए, ताकि सप्लाई और बिक्री में पारदर्शिता हो।
· ब्रांडेड फ्यूल (प्रीमियम पेट्रोल-डीजल) बेचने के दबाव पर आपत्ति। डीलरों का कहना है कि साधारण ईंधन पर मार्जिन कम है, फिर भी कंपनियां अनिवार्य रूप से महंगा ब्रांडेड ईंधन बेचने को बाध्य कर रही हैं।
किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों पर संकट
एसोसिएशन ने चेताया कि किसानों को ड्रम में डीजल सप्लाई रोकने के फैसले से ग्रामीण इलाकों में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। ट्रैक्टर, पंपसेट और अन्य कृषि उपकरणों के लिए डीजल की उपलब्धता मुश्किल हो गई है। इससे आगामी खरीफ सीजन के दौरान किसानों को परेशानी हो सकती है।
सरकारी कार्यक्रमों में उधार ईंधन का बकाया
डीलरों ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है। सरकारी रैलियों, जिला स्तरीय कार्यक्रमों और अन्य आधिकारिक आयोजनों में अक्सर उधार पर ईंधन दिया जाता है, जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इस बकाया राशि ने डीलरों की परिचालन क्षमता को प्रभावित किया है।
वैट घटाने की मांग: पंजाब जैसी दरें लागू करें सरकार
सबसे अहम मांगों में से एक है – वैट में कमी। डीलरों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि:
· पेट्रोल-डीजल पर वैट को 5 फीसदी घटाया जाए।
· पंजाब की तर्ज पर ईंधन की दरें लागू की जाएं, जहां वैट अपेक्षाकृत कम है।
डीलरों का तर्क है कि ऊंची वैट दरों के कारण राजस्थान में ईंधन के दाम पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक हैं, जिससे तस्करी और अवैध खरीद-बिक्री को बढ़ावा मिलता है।
क्या होगा अगर हड़ताल हुई?
यदि 1 जून को हड़ताल होती है, तो राजस्थान भर में 5,000 से अधिक पेट्रोल पंप बंद रहेंगे। इससे न सिर्फ आम जनता की दिक्कतें बढ़ेंगी, बल्कि एम्बुलेंस, सुरक्षा बलों और आपातकालीन सेवाओं के संचालन पर भी असर पड़ सकता है। एसोसिएशन ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। फिलहाल, स्थिति अगले 24-48 घंटों में स्पष्ट होगी।