बरगी डैम की उस काली रात में माँ ने लिखी प्रेम की अमर गाथा, - Bhaskar Crime

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बरगी डैम की उस काली रात में माँ ने लिखी प्रेम की अमर गाथा,

*बरगी डैम की उस काली रात में माँ ने लिखी प्रेम की अमर गाथा, सीने से लगाकर बच्चे को दी आखिरी दुआ*

             (मनोज विश्वकर्मा/सम्पादक)

जबलपुर। यह सिर्फ एक हादसे की तस्वीर नहीं है। यह उस शक्ति का प्रमाण है, जिसके आगे मौत भी घुटने टेक देती है माँ का प्यार।

बरगी डैम के जलमग्न होने की खबरें तो सबने सुनीं, लेकिन जब बचाव दल उस विनाशकारी जल प्रलय के बीच पहुँचा, तो उन्होंने एक ऐसा दृश्य देखा, जिसने हर कठोर दिल को पिघला दिया।

बचावकर्मी आज भी उस पल को याद कर काँप जाते हैं। पानी के थपेड़े बेहद खतरनाक थे। हर तरफ सिर्फ अंधेरा और अराजकता थी। तभी उनकी नजर एक ऐसी मूर्ति पर पड़ी, जो खुद ममता का अमर चेहरा थी।

एक माँ।

उसके शरीर पर लाइफ जैकेट थी, जिसे पहनाकर शायद उसे बचाने की कोशिश की गई थी। लेकिन कुदरत का कहर इतना भयंकर था कि वह नदी के उफनते पानी से नहीं लड़ सकी। उसके हाथ, पैर, शरीर—सब थक चुके थे। पानी ने उसकी साँसें छीन लीं।

लेकिन उसने क्या किया?

उसने अपने बच्चे को जाने नहीं दिया।

तस्वीर साफ है—माँ ने अपनी आखिरी सांस तक उस मासूम को अपने सीने से कसकर चिपकाए रखा। उसकी बाँहें ऐसी लिपटी थीं मानो वह मौत से कह रही हो, "पहले मुझे ले, मेरे बच्चे को हाथ मत लगाना।"

लाइफ जैकेट ने उसे तो बचा लिया होता, लेकिन उस लहरों के थपेड़े से नहीं बचा सके, जो किसी माँ के धैर्य की परीक्षा ले रहे थे। वह डूब गई, लेकिन डूबने से पहले उसने अपने बच्चे को प्यार की वह ढाल दी, जिसकी बराबरी कोई बचाव गियर नहीं कर सकता।

यह सिर्फ एक हादसा नहीं है।

यह उस प्रेम की व्याख्या है, जो शब्दों से परे है। वह प्रेम, जो भूख-प्यास से परे है। वह प्रेम, जो माँ कहलाने वाली हर स्त्री की आँखों में चमकता है।

जब बचावकर्मियों ने उस माँ को पानी से बाहर निकाला, तो उसके हाथों की मुट्ठी ढीली नहीं हुई थी। ऐसा लग रहा था मानो वह अभी भी कह रही हो—"मेरा बच्चा सुरक्षित है।"

जबलपुर की यह दुखद घटना हमें बताती है कि माँ का प्यार हर डर से, हर मौत से बड़ा होता है। वह जीती नहीं, लेकिन अपने बच्चे के लिए मरते-मरते भी जीने का हुनर दिखा गई।

इस तस्वीर को देखिए और महसूस कीजिए। क्योंकि यह सिर्फ एक खबर नहीं है, यह उस फरिश्ते की कहानी है, जिसने अपने आखिरी दम तक दुनिया की सबसे कीमती चीज़—एक मासूम की जान—बचाने की कोशिश की।

आँखें नम होना स्वाभाविक है। यह माँ थी।