शराब दुकान विवाद: प्रशासन ने मांगा 7 दिन का समय, हज़ारों लोगों ने किया घेराव - Bhaskar Crime

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शराब दुकान विवाद: प्रशासन ने मांगा 7 दिन का समय, हज़ारों लोगों ने किया घेराव

*गोराबाजार में शराब दुकान विवाद: प्रशासन ने मांगा 7 दिन का समय, हज़ारों लोगों ने किया घेराव*

*संघर्ष समिति का शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा, अधिकारीयों ने सात दिन का समय*

चीफ एडिटर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर। गोराबाजार क्षेत्र में अवैध शराब दुकान के खिलाफ उठे जनआंदोलन ने तब और तूल पकड़ा, जब विगत पांच दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बीच आज हज़ारों स्थानीय नागरिकों ने दुकान का घेराव कर प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बनाया। इस दौरान मौके पर पहुंचे जिला आबकारी अधिकारी  ऋषि चतुर्वेदी एवं तहसीलदार  ने प्रदर्शनकारियों की समस्याएं सुनीं और आश्वासन दिया कि मामले की जांच एवं संबंधित विभागों से विचार-विमर्श के लिए उन्हें सात दिन का समय चाहिए।

संघर्ष समिति का शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा

गोराबाजार संघर्ष समिति ने प्रशासन के इस आश्वासन को गंभीरता से लेते हुए आपसी चर्चा के बाद सात दिन की मोहलत देने का फैसला किया। साथ ही समिति ने स्पष्ट किया कि इस अवधि में आंदोलन शांतिपूर्ण धरने के रूप में जारी रहेगा, जब तक कि दुकान को पूरी तरह हटाने की पुष्टि नहीं हो जाती। समिति का कहना है कि यह जनहित का मुद्दा है और क्षेत्र की महिलाओं, बुजुर्गों एवं बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह आंदोलन अनवरत चलेगा।

इन नेताओं ने किया अहम योगदान

आज के इस बड़े जनसमर्थन वाले कार्यक्रम को सफल बनाने में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों एवं स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अहम भूमिका निभाई। इनमें मुख्य रूप से नकुल गुप्ता, पवन कनोजिया, प्रमोद बेन, पवन यादव, हेमंत मलिक, राजा ठाकुर, निशु कनौजिया, रमेश यादव, योगेश कनोजिया, मनीष वैज्ञानिक, प्रकाश अहिरवार, राजेश बेन, मनोज यादव, सोम सरवन, मिट्ठू लाल सहित दर्जनों स्थानीय लोग शामिल रहे, जिन्होंने पूरे आंदोलन को अनुशासित एवं प्रभावी बनाए रखने में अमूल्य सहयोग दिया।

प्रशासन पर बढ़ता दबाव

गौरतलब है कि यह आंदोलन पिछले पांच दिनों से लगातार जारी है, और हर दिन इसमें भाग लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह दुकान न केवल अवैध रूप से संचालित की जा रही है, बल्कि यहां आने-जाने वालों के कारण क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, शांति व सामाजिक सुरक्षा को भी खतरा बना हुआ है। अब सभी की निगाहें सात दिनों में प्रशासन द्वारा किए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला गोराबाजार क्षेत्र की जनता की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।