'जनता दरबार' में एसपी सम्पत उपाध्याय का फुल फोर्स,
102 मामलों पर एक साथ कई कारवाही का फरमान
चीफ एडिटर जबलपुर। मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को जबलपुर पुलिस मुख्यालय की फाइलें अचानक हिल गईं लेकिन इस बार धूल झाड़ने के लिए नहीं, बल्कि आम जनता की फरियाद सुनने के लिए। पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय (भा.पु.से.) ने अपने कार्यालय में एक 'मेगा जन सुनवाई' का आयोजन किया, जहां शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के लोग एक ही छत के नीचे इंसाफ की उम्मीद लेकर पहुंचे।
इस सुनवाई में जितनी फरियादें आईं, उतने ही दर्द थे। कुल 102 शिकायतों में सबसे ज्यादा स्वर सुनाई दिए
· पति-पत्नी के खींचतान और पारिवारिक तल्खी (Family Disputes) के मामले, जहां घर की दहलीज कोर्ट की पायदान बन चुकी थी।
· जमीन (Land Disputes) को लेकर भाई-भाई की रार, जहां कागजों के बीच रिश्ते दब गए थे।
· हाथापाई और मारपीट (Assault Cases) तथा साइबर अपराध—जहां ऑनलाइन ठगी ने पीड़ितों की जेबें खाली कर दी थीं।
एसपी का 'फटाफट' एक्शन प्लान
शिकायतों के इस अंबार को देखते हुए एसपी श्री उपाध्याय ने सख्त मोर्चा ले लिया। उन्होंने मात्र सुनवाई नहीं की, बल्कि मौके पर ही निर्देशों की 'बौछार' कर दी।
सभी शिकायतकर्ताओं को आश्वस्त किया गया कि अब कागजों की धूल नहीं, बल्कि कानून की कार्रवाई होगी। सबसे बड़ी बात एसपी ने समय-सीमा (Time-Bound Action) का खाका खींचते हुए सभी थाना प्रभारियों और राजपत्रित अधिकारियों को निर्देशित किया कि "एक भी शिकायत पेंडिंग न रहे, हर मामले में पारदर्शी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।"
मैदान में उतरी पुलिस की 'ब्रिगेड'
इस जनसुनवाई में एसपी अकेले नहीं थे, बल्कि पूरी कमान टीम मोर्चे पर थी
· अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) आयुष जाखड़ (भा.पु.से.)
· अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्रीमती अनु बेनिवाल (भा.पु.से.)
· अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जोन-4) सुश्री अंजना तिवारी
· नगर पुलिस अधीक्षक (बरगी) श्री अंजुल अयंक मिश्रा
· उप पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्रीमती आकांक्षा उपाध्याय
इन सभी अधिकारियों की मौजूदगी ने इसे एक बड़ा 'ऑपरेशन राहत' बना दिया, जहां हर फरियादी को अहसास हुआ कि उसकी आवाज पुलिस के सर्वोच्च पायदान तक पहुंची है।
सिर्फ SP ऑफिस ही नहीं, पूरे जिले में मची हलचल
सिर्फ मुख्यालय तक सीमित न रहते हुए, एसपी के इसी सख्त रुख की गूंज पूरे जबलपुर में फैल गई। उन्हीं के निर्देशों के तहत, सिटी कोतवाली हो या देहात की चौकियाँ—हर जगह राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officers) मैदान में उतरे और जनता की समस्याओं की सुनवाई करते रहे। इस व्यवस्था ने साबित कर दिया कि अब पुलिस 'चौपाल' से 'कोर्ट' तक का सफर एक साथ तय कर रही है।
मानवीय चेहरा बनाम कानून की कठोरता
शिकायतकर्ताओं ने जहां एक तरफ एसपी उपाध्याय के इस कदम को 'दिवाली की सौगात' बताया, वहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि सुलह (मध्यस्थता) जहां संभव होगी, वहां की जाएगी, लेकिन साइबर ठगों और जमीन माफियाओं के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। यह जनसुनवाई महज एक दिन की औपचारिकता नहीं, बल्कि 'त्वरित न्याय' के लिए पुलिस की नई पारी का आगाज है।
जबलपुर की जनता अब अपने SP से कहेगी'आप रहेंगे तो हम सुरक्षित रहेंगे!'
