*जबलपुर नगर जेठानी माता: 10 करोड़ के आभूषण और 350 किलो चांदी का रथ*
विशेष रिपोर्टर/ मनोज विश्वकर्मा
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जबलपुर की संस्कारधानी में स्थित सराफा नुनहाई क्षेत्र में स्थापित 'नगर जेठानी' माता के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। यह प्रतिमा केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि 157 साल से चली आ रही समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक भी है।
माता का श्रृंगार
नगर जेठानी माता का श्रृंगार वास्तव में अद्वितीय है। इस बार माता को 10 करोड़ रुपये से अधिक के बहुमूल्य आभूषणों से सजाया गया है, जिनमें सोना, चांदी, हीरे-मोती और माणिक शामिल हैं। इन आभूषणों का कुल वजन आधा क्विंटल (50 किलो) से भी अधिक है। माता के गले में सीतारामी हार, रामीहार, बिचोहरी, मंगलसूत्र और गुलुबंध सुशोभित हैं। हाथों में गजरागेंदा, बंगरी और सोने का बाजुबंध हैं, जबकि पैरों में पायजेब और सोने की पायल हैं।
350 किलो चांदी का रथ
माता की भव्यता केवल आभूषणों तक ही सीमित नहीं है। उनके शस्त्र तलवार, छत्र, चक्र और आरती थाल भी शुद्ध चांदी के बने हुए हैं। माता का वाहन सिंह सोने के मुकुट से सजाया जाता है। उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण 350 किलो चांदी से निर्मित विशाल रथ है, जिस पर माता विजयादशमी के दिन नगर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
सुरक्षा व्यवस्था
माता की सुरक्षा के लिए 24 घंटे पुलिस के चार सशस्त्र जवान तैनात रहते हैं। नगर भ्रमण के दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी माता की सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं।
समृद्ध सांस्कृतिक विरासत
नगर जेठानी माता की प्रतिमा 157 साल से चली आ रही समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है। इस प्रतिमा की स्थापना सराफा नुनहाई क्षेत्र में की गई थी और तब से यह प्रतिमा भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं और माता को अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।