नई श्रम संहिता से श्रमिकों का नहीं, शोषण होगा: फेडरेशन का विरोध - Bhaskar Crime

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नई श्रम संहिता से श्रमिकों का नहीं, शोषण होगा: फेडरेशन का विरोध

*नई श्रम संहिता से श्रमिकों का नहीं, शोषण होगा: फेडरेशन का विरोध*

*बिजली निजीकरण बंद करने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग*

विशेष रिपोर्टर जबलपुर भोपाल। केन्द्र सरकार द्वारा 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर लाई गई चार नई श्रम संहिताओं के खिलाफ देशभर के 10 राष्ट्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर हुई हड़ताल को मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने व्यापक समर्थन दिया। फेडरेशन ने आरोप लगाया कि ये नई संहिताएं श्रमिकों का संरक्षण नहीं, बल्कि उद्योगपतियों और प्रबंधन के हित में उनका शोषण सुनिश्चित करेंगी।

फेडरेशन कार्यालय पर आयोजित वृहद धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अभियंता और कर्मचारी शामिल हुए। कार्यपालन अभियंता अमित सक्सेना ने कहा कि उद्योग हित के साथ कर्मचारियों के हितों का संवर्धन भी आवश्यक है।

फेडरेशन महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि नई श्रम संहिताएं श्रमिक विरोधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों के लागू होने से श्रमिकों और कार्मिकों की सुरक्षा, सुविधाएं और समस्याओं का निराकरण लगभग असंभव हो जाएगा। "श्रम संगठनों का पंजीयन, संचालन और श्रमिक हितों के लिए आंदोलन व सत्याग्रह करना अब प्रबंधन व प्रशासन की मर्जी पर निर्भर हो जाएगा। यह संहिताएं मालिक और पूंजी के पक्ष में संतुलन पूरी तरह झुका चुकी हैं।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले 44 अलग-अलग कानून श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करते थे, जिन्हें समाप्त करके छंटनी और लॉक आउट को आसान बना दिया गया है।

बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर तीखा प्रहार करते हुए पाठक ने कहा कि इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कंपनीकरण का दुष्परिणाम आज भी बिजली क्षेत्र भुगत रहा है, जिससे कर्मचारी, पेंशनर्स और उपभोक्ता सभी परेशान हैं।

फेडरेशन की प्रमुख मांगें:

· नई श्रम संहिताएं तत्काल वापस ली जाएं

· बिजली कंपनियों का निजीकरण बंद किया जाए

· बिजली क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत सभी संविदा एवं आउटसोर्स कार्मिकों को बिना शर्त नियमित किया जाए

· न्यू पेंशन स्कीम हटाकर पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए

· सभी श्रेणी के पेंशनर्स की पेंशन सुरक्षा की गारंटी राज्य एवं केन्द्र सरकार लें

· मध्यप्रदेश में नियमित कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई राहत एवं परिवार पेंशन राहत दी जाए

· राज्य बंटवारे की धारा 49 समाप्त की जाए, जिससे लाखों पेंशनर्स का आर्थिक शोषण बंद हो

प्रदर्शन में सीताराम कुरचानिया, आर एस परिहार, दिनेश दुबे, अनूप वर्मा, उमाशंकर दुबे, अवनीश तिवारी, राजेश मिश्रा, रवि चौबे, श्रीकांत दुबे, डी के चतुर्वेदी, अजय चौबे, मनोज पाठक, मोहित पटेल, दिलीप पाठक, संजय सिंह, अक्षय श्रीवास्तव सहित आर के परोहा, सुधीर मिश्रा, विनय पाठक, शिवहरि श्रीवास्तव, विजय तिवारी किसलय, अविनाश तिवारी, सुरेन्द्र तिवारी, बसंत मिश्रा, दयाशंकर, विजय डोंगरे, सतेन्द्र सुहाने, शुभम चंदेल, राजेन्द्र चक्रवती, एच एम मसूंरी, संजय अहिरवार सहित बड़ी संख्या में अभियंता एवं कर्मचारी उपस्थित थे।