मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के जननायक थे: डी.पी.पाठक - Bhaskar Crime

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मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के जननायक थे: डी.पी.पाठक

*कर्मचारी हितैषी से जननायक: डी. पी. पाठक की 15वीं पुण्यतिथि पर अमित सक्सेना का भावपूर्ण संदेश*

"संवाद से समाधान" की नीति पर चले डी. पी. पाठक, आज भी प्रासंगिक हैं ऐतिहासिक वेतन सुधार

विशेष रिपोर्टर जबलपुर, 12 फरवरी। मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के संस्थापक महामंत्री एवं पूर्व विधायक स्व. डी. पी. पाठक की 15वीं पुण्यतिथि श्रमशक्ति दिवस के रूप में संचालन संधारण संभाग विजय नगर परिसर में बड़े ही श्रद्धापूर्ण माहौल में मनाई गई। इस अवसर पर कार्यपालन अभियंता अमित सक्सेना ने कहा कि डी. पी. पाठक जी न केवल कर्मचारियों के मसीहा थे, बल्कि अपने कुशल नेतृत्व और जनसेवा के कारण आम जनता के भी जनप्रिय नेता बने।

श्री सक्सेना ने कहा, "आदरणीय पाठक जी के कार्यकाल में जहाँ कर्मचारियों को बेहतरीन सुविधाएं और समस्याओं का समाधान मिला, वहीं वे स्वयं कर्मचारी क्षेत्र में लोकप्रिय होते हुए आम जनता के विधायक बने। यह दुर्लभ उपलब्धि है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि उद्योग की भलाई और कर्मचारी हित एक-दूसरे के पूरक हैं, और यही पाठक जी की सोच थी।

श्रमिकों के मसीहा को शत्-शत् नमन:

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सीताराम कुरचानिया ने कहा कि पाठक जी के नेतृत्व में फेडरेशन एक अनुशासित और रचनात्मक संगठन बना। उन्होंने बिजली उद्योग और कर्मचारी हितों को संतुलित रखते हुए जो निर्णय कराए, वे आज भी प्रासंगिक हैं।

वरिष्ठ नेता आर. एस. परिहार ने कहा कि पाठक जी एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव रखी। उनके कराए वेतन पुनरीक्षण और पेंशन जैसे निर्णय आज भी मील का पत्थर हैं।

फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी. पी. पाठक ने कहा कि पूज्यनीय डी. पी. पाठक हमेशा संवाद में विश्वास रखते थे। "उद्योगों की प्रगति से ही कर्मचारियों की उन्नति संभव है," यह उनकी सकारात्मक सोच थी। उन्होंने प्रबंधन और शासन से चर्चा कर वेज रिवीजन, फ्रिंज बेनिफिट और पेंशन जैसे ऐतिहासिक निर्णय कराए, जिनका लाभ आज भी कर्मचारी और पेंशनर्स ले रहे हैं।

गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित:

इस अवसर पर व्ही. पी. केवट, अजय सिंह ठाकुर, विजय डोंगरे, आर. के. परोहा को शॉल-श्रीफल से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को दिनेश दुबे, अनूप वर्मा, संजय सिंह, उमाशंकर दुबे, अवनीश तिवारी, विजय तिवारी (किसलय), बसंत मिश्रा, मनोज पाठक, दिलीप पाठक, दयाशंकर ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि डी. पी. पाठक ने श्रम क्षेत्र में पूरे देश में एक अलग पहचान बनाई और संगठन को शून्य से शिखर तक पहुँचाया। इस अवसर पर संदेश यादव, विनय पाठक, शिवहरि श्रीवास्तव, सतेन्द्र सुहाने, एच. एम. मसूंरी, एस. के. चौधरी, अभिनव कृष्ण त्रिपाठी, नवीन पाठक, दिलीप यादव, विवेक चौबे, आशीष गुर्गे, शैलेन्द्र जैन, अजय दुबे, नरेश दुबे, राजेश मिश्रा, आर. के. चौबे, के. यादव, गुलाब सिंह राजपूत, संजय अहिरवार, विनोद झारिया, अशोक राठौर, घनश्याम पटैल, चेतन अग्रहरि, प्रतीक चौधरी, राम पटेल, राजेश कुमार सोनी, रवि बहादुर सिंह, शुभम चंदेल, विशाल नेमा, मनोज सिंह, राजेन्द्र चक्रवर्ती, अक्षय श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में फेडरेशन के पदाधिकारी एवं महिला-पुरुष कर्मचारी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन उमाशंकर दुबे ने किया एवं आभार सुरेन्द्र तिवारी ने व्यक्त किया। शुभारंभ सभी अतिथियों ने स्व. डी. पी. पाठक के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया।