बढ़ता अपराध: मामूली बात पर चाकूबाजी, पुलिस प्रशासन पर उठ रहे सवाल - Bhaskar Crime

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बढ़ता अपराध: मामूली बात पर चाकूबाजी, पुलिस प्रशासन पर उठ रहे सवाल

*जबलपुर में बढ़ता अपराध: मामूली बात पर चाकूबाजी, पुलिस प्रशासन पर उठ रहे सवाल*


*शहर में कानून व्यवस्था पर नियंत्रण पाने में पुलिस विभाग को सफलता नहीं मिल पा रही है*

 ( मनोज विश्वकर्मा/ सम्पादक)

जबलपुर (मध्य प्रदेश)। संस्कारधानी जबलपुर में एक बार फिर से चाकूबाजी की घटनाओं ने आम जनता में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। शहर की सीमा से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक, छोटी-छोटी बातों पर युवकों द्वारा चाकू निकालकर हमला करने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में पुरानी रंजिश या तुच्छ कहासुनी को लेकर हुए विवादों में चाकू के हमले किए गए हैं। इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि शहर में कानून व्यवस्था पर नियंत्रण पाने में पुलिस विभाग को सफलता नहीं मिल पा रही है।

क्या पुलिस पर है राजनीतिक दबाव: स्थानीय निवासियों का कहना है कि अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े वारदात को अंजाम दे रहे हैं। लोगों का आरोप है कि पुलिस विभाग पर कुछ राजनेताओं या उच्च अधिकारियों का दबाव है, जिसके चलते असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है। "जब तक ऊपर से दबाव नहीं बनेगा, पुलिस चुप्पी साधे रहती है," एक स्थानीय व्यवसायी ने नाम न छापने की शर्त पर यह बात कही।

रात्रि होटल रेस्टोरेंट और शादी समारोह बने सिरदर्द: एक और बड़ा मुद्दा जो इन घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है, वह है देर रात तक खुलने वाले प्रतिष्ठान। आधी रात तक चाय-पान की दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट के खुले रहने से अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। इसके अलावा, शादी समारोहों में भी कोई विशेष पुलिस व्यवस्था नहीं होने के कारण वहां भी छोटी-मोटी घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग: नागरिकों का कहना है कि यदि अब भी पुलिस विभाग ने संज्ञान नहीं लिया तो स्थिति और विकट हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि रात में गश्त बढ़ाई जाए, संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी की जाए और देर रात खुलने वाले प्रतिष्ठानों के समय में कटौती की जाए।

जबलपुर में कानून व्यवस्था को लेकर यह बढ़ती चिंता पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, वहीं आम नागरिक सुरक्षित माहौल के लिए तरस रहे हैं।