भेड़ाघाट का ऐतिहासिक संग्रहालय: धरोहरों जो खंडहरों में तब्दील हो चुका है - Bhaskar Crime

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भेड़ाघाट का ऐतिहासिक संग्रहालय: धरोहरों जो खंडहरों में तब्दील हो चुका है

*भेड़ाघाट का ऐतिहासिक संग्रहालय: धरोहरों जो खंडहरों में तब्दील हो चुका है*

*ताले लटक गए और देखरेख के अभाव में यह स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया*

शासन-प्रशासन की उदासीनता से चोरी और उपेक्षा के बीच बदहाल संग्रहालय, पुनर्जीवन की मांग

( मनोज विश्वकर्मा=फोटोजर्नलिस्ट / सम्पादक हैड)

जबलपुर। भेड़ाघाट के दीनदयाल पार्क में स्थित ऐतिहासिक संग्रहालय, जो कभी भारतीय संस्कृति की धरोहरों के संरक्षण का केंद्र था, आज उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर में तब्दील हो चुका है। साल 1993 में तत्कालीन विधायक मोती कश्यप और नगर पंचायत अध्यक्ष अनिल तिवारी के प्रयासों से निर्मित इस संग्रहालय की वर्तमान दुर्दशा क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ इतिहास प्रेमियों के लिए शर्म का विषय है।

संग्रहालय को चौंसठ योगिनी और त्रिपुर सुंदरी मंदिर सहित आसपास के क्षेत्रों की प्राचीन मूर्तियों से सजाया गया था। पुरातत्व विभाग के सहयोग से तैयार इस संग्रहालय का संचालन नगर पंचायत को सौंपा गया था, लेकिन समय के साथ यहां ताले लटक गए और देखरेख के अभाव में यह स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया।

वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है:

· संग्रहालय के अंदर 20-20 फीट ऊंचे पेड़ उग आए हैं।

· रखी गई प्राचीन मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं।

· लाइट, खंभे सहित अन्य बिजली उपकरण भी चोरी हो गए हैं।

· असामाजिक तत्व यहां शराब पीने और अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक तरफ घरों और गांवों से मूर्तियों को जबरन उठवाकर यहां लाया गया, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने संग्रहालय की सुरक्षा को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं दिखाई। इससे धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं।

क्षेत्र के नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शासकीय धन से बने इस संग्रहालय को पुनर्जीवित करना न केवल सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह भेड़ाघाट में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय आस्था के सम्मान का भी सवाल है।

अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस अनदेखी को समाप्त करें और संग्रहालय को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम उठाएं।