*एनसीसी कैंप में हीट स्ट्रोक से हड़कंप, 21 कैडेट्स अस्पताल में भर्ती*
चीफ एडिटर जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में डुमना रोड स्थित ट्रिपल आईटीडीएम परिसर में आयोजित एनसीसी के 10 दिवसीय संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (सीएटीसी-98) में गुरुवार को भीषण गर्मी ने भयंकर रूप दिखाया। तापमान 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, जिससे करीब दो दर्जन कैडेट्स हीट स्ट्रोक का शिकार हो गए। सभी को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज जारी है।
पूरा मामला: क्या हुआ और कैसे हुआ?
· शिविर की अवधि: 14 मई से प्रारंभ, अभी जारी
· कुल प्रतिभागी: लगभग 450 कैडेट्स (कटनी, तेंदूखेड़ा, कटंगी, नुनसर आदि क्षेत्रों से)
· घटना का समय: गुरुवार शाम तक (प्रशिक्षण दोपहर में भी जारी था)
· प्रभावित: 20 से अधिक छात्राएं + 1 छात्र
· मुख्य कारण: अत्यधिक धूप, खुले मैदान में निरंतर कठोर अभ्यास, पर्याप्त पानी की कमी
शाम होते-होते कई कैडेट्स बेसुध होकर मैदान में गिरने लगे। लगातार उल्टी, चक्कर और डिहाइड्रेशन के गंभीर लक्षण सामने आए।
अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल
रात करीब 8:30 बजे सभी बीमार कैडेट्स को एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के एक साथ आने से आपातकालीन वार्ड में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत:
· अतिरिक्त बेड, ड्रिप स्टैंड और दवाओं की व्यवस्था की
· अतिरिक्त चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ तैनात किया
· सभी कैडेट्स को अलग-अलग वार्डों में शिफ्ट किया
सीएमएचओ का बयान: "स्थिति नियंत्रण में है"
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने स्वयं मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा:
"सभी प्रभावित कैडेट्स की जांच में हीट स्ट्रोक और गंभीर डिहाइड्रेशन के लक्षण पाए गए हैं। उन्हें तुरंत वार्डों में भर्ती कर विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उपचार दिया जा रहा है। अब सभी की स्थिति स्थिर है।"
फूड प्वाइजनिंग की अफवाहों का खंडन
जैसे ही खबर फैली, सोशल मीडिया पर यह अफवाह उड़ने लगी कि खाने में मिलावट या दूषित भोजन के कारण कैडेट्स बीमार हुए हैं। इससे ट्रिपल आईटीडीएम प्रबंधन भी संदेह के दायरे में आ गया।
स्पष्टीकरण:· एनसीसी और अस्पताल प्रशासन ने संयुक्त रूप से अफवाहों को खारिज किया।
· चिकित्सीय जांच में केवल हीट स्ट्रोक की पुष्टि हुई, फूड प्वाइजनिंग का कोई मामला नहीं।
· साथ ही साफ किया गया कि बीमार कैडेट्स एनसीसी के हैं, ट्रिपल आईटीडीएम के नियमित छात्र नहीं।
क्यों हुआ हादसा? लापरवाही या अनुशासन?
· तापमान 44°C के बावजूद खुले मैदान में प्रशिक्षण जारी रखा गया।
· कुछ छात्राओं ने घर लौटने की गुहार लगाई थी, लेकिन "अनुशासन" का हवाला देकर प्रबंधन ने रोक दिया।
· पर्याप्त छाया, पानी और ब्रेक की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
· सभी कैडेट्स खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
· अस्पताल में उनकी निगरानी जारी है।
· प्रशासन ने बाकी कैडेट्स के लिए प्रशिक्षण के समय और स्थान पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया है।
नोट: यह घटना अत्यधिक गर्मी में बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के आउटडोर प्रशिक्षण के खतरों को उजागर करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 40°C से अधिक तापमान में कठोर शारीरिक गतिविधि से हीट स्ट्रोक का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
