बरगी बांध हादसे के बाद भी अनदेखी: नर्मदा के किसी भी घाट पर नावों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं - Bhaskar Crime

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बरगी बांध हादसे के बाद भी अनदेखी: नर्मदा के किसी भी घाट पर नावों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं

*बरगी बांध हादसे के बाद भी अनदेखी: नर्मदा के किसी भी घाट पर नावों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं*

(मनोज विश्वकर्मा/ सम्पादक )

चीफ एडिटर जबलपुर (नर्मदा तट)। नर्मदा नदी में बरगी बांध क्षेत्र में हाल ही में हुई दर्दनाक नाव दुर्घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि नदी पर चलने वाली नावों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। खास बात यह है कि यह हालत केवल बांध क्षेत्र की ही नहीं, बल्कि जबलपुर के प्रमुख घाटों — गौरीघाट, तिलवारा घाट, पंचवटी घाट समेत अन्य घाटों पर भी ऐसी ही है।

 (भेड़ाघाट आधे से ज्यादा बिना लाइफ जैकेट नहीं पहने)

निष्कर्ष:नर्मदा को 'जीवनदायिनी' कहा जाता है, लेकिन उसके घाटों पर बैठने वाले लाखों श्रद्धालु और पर्यटक प्रशासन की लापरवाही के कारण जोखिम में हैं। बिना सुरक्षा उपकरणों और बिना प्रशिक्षित दल के नावों का संचालन एक बड़ा हादसा न्योता है। अब देर किए बिना ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

लाइफ जैकेट तो दूर, बुनियादी सुरक्षा के साधन भी नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, सभी घाटों पर नावों का संचालन तो जारी है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई भी प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आता। लाइफ जैकेट (जीवन रक्षक जैकेट) की तो बात ही छोड़ दीजिए, नावों पर लाइफ बॉय, रस्सी, प्राथमिक चिकित्सा किट या आपातकाल में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं।

हादसे के बाद होता है हंगामा, लेकिन तैयारी नहीं

पर्यटकों और स्थानीय लोगों के अनुसार, किसी अनहोनी के बाद स्थानीय गोताखोर तुरंत बचाव अभियान में जुट जाते हैं, लेकिन पेशेवर सुरक्षा टीमें — जैसे NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) या अन्य प्रशिक्षित दल — को घटनास्थल तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। इस देरी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ जाती है।

   अवैध रेत उत्खनन से गहरे हो चुके हैं घाट

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लगातार अवैध रेत उत्खनन के चलते नर्मदा के कई घाटों की गहराई खतरनाक स्तर तक बढ़ चुकी है। ऐसे में नावों के पलटने पर खतरा और भी अधिक बढ़ जाता है।

    हर 100 मीटर पर कोई टीम तैनात नहीं

प्रशासन की तरफ से शेखी बघारी जाने वाली "हर 100 मीटर पर सुरक्षा टीम" की व्यवस्था पूरी तरह से कागजों तक सीमित है। वास्तविकता यह है कि किसी भी घाट पर इस तरह की कोई टीम नजर नहीं आती।

      प्रशासन के सामने क्या सवाल हैं ?

· क्या बरगी बांध हादसे के बाद कोई सुरक्षा ऑडिट हुआ?

· घाटों पर लाइफ जैकेट और अन्य उपकरण क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए?

· अवैध रेत खनन के कारण बढ़ती गहराई पर क्यों नहीं लगाम लगाई जा रही?

· एनडीआरएफ जैसी टीमें त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार क्यों नहीं?