*नसबंदी के बावजूद तीसरी बार बनी मां, पति-पत्नी ने कलेक्टर से की गुहार*
"आप गर्भपात करा लो, हम शासन से पैसे दिला देंगे।"
"अधिकारियों ने मेरी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही कोई उचित कार्रवाई की गई।"
चीफ एडिटर /जबलपुर जिला चिकित्सालय में नसबंदी ऑपरेशन के बाद भी एक महिला तीसरी बार मां बन गई। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के कारण यह घटना हुई। पीड़ित दंपत्ति ने कलेक्टर से न्याय और मुआवजे की गुहार लगाई है।
पीड़िता क्या कहती है?
शिवानी कुंडे (26), पति आशीष कुंडे (अनुसूचित जाति), निवासी 99 बरगी हिल्स, सरदार वल्लभ भाई पटेल वार्ड, दुर्गा कालोनी, गढ़ा, जबलपुर ने बताया कि उनके पहले से दो बच्चे हैं 6 वर्षीय बेटा आकर्ष और डेढ़ वर्षीय बेटी सायरा।
"दो बच्चों के बाद परिवार नियोजन के तहत मैंने 30 जनवरी 2025 को जिला चिकित्सालय (सेठ गोविंद दास अस्पताल), जबलपुर में नसबंदी करवाई थी।"
गर्भ ठहरने का एहसास
नसबंदी के कुछ दिनों बाद शिवानी को गर्भ के लक्षण महसूस हुए। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र तिलवारा में शिकायत की। वहां किट से जांच हुई तो पता चला कि तीन माह का गर्भ है।
केंद्र के कर्मचारियों ने सोनोग्राफी कराने को कहा। रिपोर्ट में भी गर्भ में बच्चा होने की पुष्टि हुई। शिवानी ने रिपोर्ट स्वास्थ्य केंद्र में जमा कर दी।
इलाज या लापरवाही?
शिवानी के मुताबिक, स्वास्थ्य केंद्र ने कहा "हम फोन करेंगे, तब आना।" लेकिन काफी समय तक कोई फोन नहीं आया। जब पीड़िता ने स्वयं संपर्क किया तो जवाब मिला:
"आप गर्भपात करा लो, हम शासन से पैसे दिला देंगे।"
शिवानी और उनके पति अधिकारियों के चक्कर काटते रहे। तब तक उन्हें सात माह का गर्भ हो चुका था। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन (नंबर: 2654936) पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
दिसंबर 2025 में जन्म
समय निकलता गया और दिसंबर 2025 में शिवानी ने एक पुत्र को जन्म दे दिया। इस अनचाहे बच्चे के जन्म के बाद उनके सामने पालन-पोषण की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई।
प्रशासन के आगे गुहार
शिवानी ने 7 अप्रैल 2026 को लोक सुनवाई में कलेक्टर से मुलाकात की और पूरी घटना की जानकारी दी। उनका आरोप है:
"अधिकारियों ने मेरी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही कोई उचित कार्रवाई की गई।"
क्यों मुश्किल में है परिवार?
शिवानी कहती हैं कि वह एक गरीब, अनुसूचित जाति की महिला हैं। मजदूरी करके परिवार चलाती हैं। पहले से दो बच्चों का खर्चा उठाना मुश्किल था, अब तीसरे बच्चे ने उनकी आर्थिक स्थिति और खराब कर दी है।
"अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण मुझे इस अनचाहे बच्चे को जन्म देना पड़ा। अब पालन-पोषण में अत्यंत कठिनाई हो रही है।"
पीड़िता की मांग
शिवानी ने कलेक्टर से करबद्ध प्रार्थना करते हुए कहा कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार उन्हें उचित लाभ और मुआवजा दिलाया जाए, ताकि वह अपने परिवार का जीवन यापन कर सकें।
गौरतलब है कि सरकारी अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन के बाद गर्भ ठहरना चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला माना जाता है। फिलहाल इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
