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प्रदेश में पेयजल संकट को लेकर सरकार सख्त, प्रभारी मंत्रियों की जवाबदेही तय

*मुख्यमंत्री का निर्देश पेयजल संकट को मंत्री गंभीरता से देखें*


प्रदेश में पेयजल संकट को लेकर सरकार सख्त, प्रभारी मंत्रियों की जवाबदेही तय

विशेष रिपोर्टर भोपाल। मध्यप्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ पेयजल संकट गहराता जा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रदेश सरकार ने अब प्रभारी मंत्रियों की जवाबदेही तय करने का कड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में पेयजल व्यवस्था की सक्रिय निगरानी करें और किसी भी सूरत में संकट की स्थिति नहीं बनने दें।

मंत्रियों पर शिकंजा – कलेक्टर से पहले मंत्री से जवाब

सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि किसी जिले में पेयजल संकट की गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, तो सबसे पहले संबंधित कलेक्टर से नहीं, बल्कि उस जिले के प्रभारी मंत्री से जवाब मांगा जाएगा। मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि मंत्री अगले सप्ताह से अपने जिलों का दौरा करें और कम से कम दो दिन वहां रुककर पेयजल व्यवस्था की जमीनी हकीकत जांचें।

चौपाल लगाकर लोगों से सीधा संवाद करें मंत्री

मंत्रियों को गांवों और कस्बों में चौपाल लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वे सीधे लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुन सकें। लोगों की शिकायतों का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करने और स्थानीय लोगों के साथ संवाद बढ़ाने को भी कहा गया है।

हर जिले में कंट्रोल रूम स्थापित

प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए हैं, जहां से रोजाना पेयजल स्थिति की मॉनिटरिंग की जाएगी। मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कंट्रोल रूम में प्राप्त किसी भी शिकायत का तत्काल निराकरण कराया जाए और संकटग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों से पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने ली कई बैठकें, कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस सप्ताह पेयजल व्यवस्था को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं। पीएचई विभाग और नगरीय निकायों से जुड़े कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं, ताकि किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

इंदौर-उज्जैन सहित कई जिलों में बिगड़े हालात

सरकार को मिले फीडबैक के अनुसार, इंदौर, उज्जैन सहित कई जिलों में जलस्तर तेजी से गिर रहा है और जलापूर्ति प्रभावित होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संकटग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों से पानी सप्लाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री करेंगे उच्चस्तरीय बैठक

मुख्यमंत्री मोहन यादव अगले सप्ताह पेयजल व्यवस्था को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सकते हैं। साथ ही, आगामी कैबिनेट बैठक में भी इस मुद्दे पर गहन चर्चा होने की संभावना है।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1500 करोड़ रुपये जारी

प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति मजबूत करने के लिए 1500 करोड़ रुपये जारी किए हैं। वहीं, पंचायतों को पेयजल रखरखाव (मेंटेनेंस) कार्यों के लिए 10 हजार रुपये तक खर्च करने के अधिकार भी दिए गए हैं, ताकि छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही हो सके।