सीएम ने जनसुनवाई में आत्महत्या की शिकायत पर जताई नाराजगी,
अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश
चीफ एडिटर/मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में आई एक दिल दहला देने वाली शिकायत ने प्रशासनिक अधिकारियों की नींद हराम कर दी है। जनसुनवाई के दौरान कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जहर खा रहे हैं और आत्महत्या करने को मजबूर हैं। शिकायतकर्ताओं ने अवैध खनन पर पुलिस-प्रशासन की सख्ती न होने पर भी सवाल उठाए।
इस गंभीर शिकायत पर मुख्यमंत्री ने अत्यधिक नाराजगी जताते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कड़ा रुख अपनाया। यह नाराजगी उस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सामने आई, जब जैन सभी कलेक्टरों और कमिश्नरों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे और उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को दिए ये सख्त निर्देश:
1. अवैध वाहनों पर तुरंत शिकंजा: मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि खनिज परिवहन में लगे बिना नंबर प्लेट और टूटी-फूटी नंबर प्लेट वाले वाहनों को राजसात किया जाए। उन्होंने कहा, "जितनी जल्दी हो, ऐसे वाहनों को नीलाम भी किया जाए।"
2. पुराने मामलों की पड़ताल: अवैध खनन के पुराने मामलों को फिर से निकालकर उनकी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि दोषियों को सजा मिल सके।
3. जनसुनवाई को गंभीरता से लें: सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई को प्रशासन का सशक्त माध्यम बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां आने वाले मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। अधिकारी मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं और शिकायतों का संतुष्टिपूर्वक निराकरण करें।
प्रशासन पर सवाल: "कैसा है ये शासन?"
शिकायतकर्ताओं ने सीधा सवाल किया, "अवैध खनन करने वालों पर पुलिस-प्रशासन का कोई खौफ नहीं है। ऐसे में कैसे कोई भी व्यक्ति ट्रैक्टर या बाइक चढ़ा देने की हिम्मत कर सकता है? ये कैसा शासन है?" इस सवाल के बाद माहौल गरमा गया।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने माना कि कलेक्टर और एसपी की जिम्मेदारी है कि ऐसा करने वालों पर सख्त एक्शन लिया जाए, ताकि ऐसी घटनाएं न हों और शासन का संदेश जन-जन तक जाए।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के इस सख्त रुख के बाद प्रदेश के सभी जिलों में अवैध खनन के खिलाफ अभियान तेज होने की संभावना है। प्रशासन पर अब यह साबित करने की जिम्मेदारी है कि जनसुनवाई में उठाई गई गंभीर समस्याओं का समाधान केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी बदलाव दिखे।
