मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय का सख्त निर्देश पर विभाग में हड़कंप - Bhaskar Crime

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मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय का सख्त निर्देश पर विभाग में हड़कंप

*मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय का सख्त निर्देश:मालखाने में गड़बड़ी पर अब एसपी-डीएसपी भी होंगे जवाब*

 85 लाख के गबन के बाद बदली व्यवस्था,पुलिस अधिकारियों में हड़कंप

चीफ एडिटर भोपाल, 24 मई 2026। मध्य प्रदेश पुलिस के थानों में जब्त माल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को सख्त निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मालखानों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या गबन पर अब सीधे थाना प्रभारी से लेकर डीएसपी और एसपी स्तर के अधिकारियों तक की जवाबदेही तय की जाएगी। यह कार्रवाई बालाघाट जिले के एक थाने के मालखाने से करीब 85 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आने के बाद उठाया गया कदम है।

बालाघाट का बड़ा गबन: जब्त नकदी हुई गायब

जानकारी के अनुसार, बालाघाट जिले के एक थाने के मालखाने में रखी करीब 85 लाख रुपये की नकदी अचानक गायब मिली। यह राशि विभिन्न अपराधिक मामलों में जब्त की गई थी। मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस मुख्यालय ने तत्काल जांच के आदेश दिए। जांच में सामने आया कि लंबे समय से मालखाने की नियमित जांच-पड़ताल नहीं हुई थी और थाना प्रभारी बदलने के दौरान जब्त माल का भौतिक सत्यापन नहीं किया गया। इस लापरवाही के चलते ही यह गबन संभव हो सका।

इस घटना के बाद पुलिस मुख्यालय हरकत में आया और अब पूरे प्रदेश में मालखानों की सुरक्षा को लेकर नई गाइडलाइन जारी की गई है।

नए निर्देशों की मुख्य बातें:

1. तबादले पर अनिवार्य भौतिक सत्यापन

पीएचक्यू की सीआईडी शाखा के अनुसार, अब यदि किसी मामले के विवेचना अधिकारी (आईओ) या थाना प्रभारी का तबादला होता है या उन्हें बदला जाता है, तो मालखाने में जमा सभी जब्त सामान का भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से करना होगा। पुराना अधिकारी ही नए अधिकारी को प्रत्येक वस्तु दिखाकर सौंपेगा। इसके बाद ही चार्ज सौंपने की लिखित प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।

2. संपूर्ण रिकॉर्ड का हस्तांतरण

निर्देशों में कहा गया है कि पूर्व विवेचक को जब्त माल से जुड़ी हर कार्रवाई – जैसे एफएसएल प्रयोगशाला को सैंपल भेजना, अदेश पर हवालात में जमा करना, अदालत में पेश करना या किसी को सुपुर्दगी देना – का पूरा और पारदर्शी रिकॉर्ड नए अधिकारी को सौंपना होगा। यह रिकॉर्ड डिजिटल और भौतिक दोनों रूपों में सुरक्षित रखा जाएगा।

3. वरिष्ठ अधिकारियों की नियमित निगरानी

अब सिर्फ थाना प्रभारी ही जिम्मेदार नहीं होगा, बल्कि:

· डीएसपी स्तर के अधिकारी हर महीने अपने क्षेत्र के थानों के मालखानों का निरीक्षण करेंगे।

· अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) और एसपी स्तर के अधिकारी हर तिमाही में औचक निरीक्षण करेंगे।

· डीआईजी और उससे वरिष्ठ अधिकारी साल में कम से कम एक बार मालखानों का ऑडिट करेंगे।

हर निरीक्षण के बाद रिकॉर्ड का मिलान अनिवार्य होगा और रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजनी होगी।

4. लापरवाही पर सीधी कार्रवाई

पीएचक्यू ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि किसी थाने के मालखाने में कोई गड़बड़ी पाई जाती है – चाहे वह नकदी, जेवरात, मादक पदार्थ, अवैध शराब या किसी अन्य जब्त सामान की हो – तो संबंधित थाना प्रभारी, तत्कालीन विवेचना अधिकारी, क्षेत्र के डीएसपी और यहां तक कि एसपी स्तर के अधिकारी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।

प्रदेश के 1100+ थानों पर लागू

मध्य प्रदेश में 1100 से अधिक पुलिस थाने हैं, जिनके मालखानों में जब्त नकदी, सोने-चांदी के जेवरात, महत्वपूर्ण दस्तावेज, मादक पदार्थ, अवैध शराब, हथियार और अन्य कीमती सामान रखा जाता है। अब तक अधिकतर मामलों में थाना प्रभारी बदलने पर केवल कागजी प्रक्रिया निभाई जाती थी, बिना वास्तविक सामान देखे। इसी कारण कई बार जब्त माल गायब होने या उसमें हेराफेरी की शिकायतें सामने आती रही हैं।

पुलिस अधिकारियों में हड़कंप

नए निर्देशों के जारी होते ही प्रदेश भर के पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। कई थाना प्रभारी और डीएसपी स्तर के अधिकारियों ने पुराने तबादलों में मालखाने के रिकॉर्ड को लेकर चिंता जताई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "पहले जहां मालखाने के सत्यापन को नजरअंदाज कर दिया जाता था, अब यह पदस्थापना का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। कोई भी अधिकारी अब जिम्मेदारी लेने से पहले सौ बार सोचेगा।"

आम जनता को क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा:

· अदालतों में लंबित मामलों में जब्त माल (जेवरात, नकदी आदि) के गुम होने की घटनाएं रुकेंगी।

· पीड़ितों को उनका जब्त सामान समय पर लौटाए जाने की उम्मीद बढ़ेगी।

· मादक पदार्थों और अवैध शराब जैसे संवेदनशील मामलों में सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका कम होगी।

आगे की कार्रवाई

पुलिस मुख्यालय ने सभी जिला एसपी को निर्देश दिए हैं कि वे अब तक के सभी थाना प्रभारी और विवेचना अधिकारियों के तबादलों में मालखाने के सत्यापन की स्थिति की रिपोर्ट तलब करें। साथ ही, बालाघाट मामले में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ जांच पूरी करके जल्द से जल्द चार्जशीट पेश करने को कहा गया है।

मालखानों की सुरक्षा के लिए अब कई जिलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और डिजिटल एंट्री सिस्टम लागू करने की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि हर जब्त वस्तु की एंट्री-एग्जिट पूरी तरह ट्रैक की जा सके।

सीधे शब्दों में कहें तो: अब पुलिस थानों के मालखानों में पहले से ज्यादा सख्ती होगी, गड़बड़ी पर सिर्फ कांस्टेबल या हेड कांस्टेबल नहीं, बल्कि एसपी-डीएसपी स्तर के अधिकारी भी जेल जा सकते हैं।