*ESIC मैनेजर ने लकवाग्रस्त कर्मचारी से मांगी रिश्वत, ACB ने रंगे हाथों दबोचा* - Bhaskar Crime

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*ESIC मैनेजर ने लकवाग्रस्त कर्मचारी से मांगी रिश्वत, ACB ने रंगे हाथों दबोचा*

*ESIC मैनेजर ने लकवाग्रस्त कर्मचारी से मांगी रिश्वत, ACB ने रंगे हाथों दबोचा*


"रिश्वतखोर : कुछ शर्म और कुछ रहम कर देते मैडम"

"एक लकवाग्रस्त दुखी व्यक्ति पर तो दया का भाव दिखा ही सकते थे"

चित्तौड़गढ़  एक ओर जहां प्रशासन भ्रष्टाचार मुक्ति के लिए प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों में तैनात कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों पर शर्मसार कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है चित्तौड़गढ़ के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में, जहां शाखा प्रबंधक ने एक लकवाग्रस्त कर्मचारी से मेडिकल बिल और छुट्टियों के पैसे के एवज में रिश्वत मांगी।

भ्रष्टाचार की इस घटना ने मानवता को भी शर्मसार कर दिया है, क्योंकि आरोपी महिला प्रबंधक ने बेहाल और बीमार व्यक्ति पर कोई दया नहीं दिखाई।

एसीबी की बड़ी कार्रवाई

एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की स्पेशल यूनिट, उदयपुर ने यह कार्रवाई अंजाम दी। एसीबी टीम ने श्रीमती संदीपा वोहरा (शाखा प्रबंधक, ESIC चित्तौड़गढ़) को 30 मई को उनके कार्यालय कक्ष में 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। रिश्वत की यह पूरी राशि टीम ने बरामद कर ली।

 पूरा मामला क्या है : पीड़ित कर्मचारी: एल एंड टी (L&T) कंपनी का एक कर्मचारी, जो अगस्त 2025 में ड्यूटी के दौरान लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो गया था।

· मांग: आरोपी मैडम ने कर्मचारी के मेडिकल बिलों के भुगतान और मेडिकल लीव (छुट्टियों) के पैसे पास करवाने के बदले रिश्वत की मांग की।

· पहले भी दिया जा चुका था लालच: आरोपीया द्वारा पूर्व में भी अन्य कर्मचारियों के क्लेम पास करने के एवज में दबाव बनाकर ₹40,000 की रिश्वत ली जा चुकी है।

 एसीबी की प्लानिंग और धरपकड़

1. शिकायत दर्ज - पीड़ित कर्मचारी की ओर से शिकायत मिलने के बाद एसीबी हरकत में आई।

2. सत्यापन (29 मई) - पुलिस निरीक्षक श्री लक्ष्मण डांगी ने रिश्वत की मांग का सत्यापन किया, जो सही पाई गई।

3. जाल बिछाकर गिरफ्तारी (30 मई) - सत्यापन की पुष्टि होते ही एसीबी टीम ने अपना जाल बिछाया और आरोपी शाखा प्रबंधक को उसी के कार्यालय में ₹10,000 लेते हुए धर दबोचा।

एसीबी के अधिकारियों का बयान (अनौपचारिक)

"एक लकवाग्रस्त, बेसहारा व्यक्ति जो पहले से ही दर्द और बीमारी से जूझ रहा था, उस पर तो कम से कम दया दिखा सकती थीं। रिश्वत के लिए ऐसे असहाय व्यक्ति को निशाना बनाना बेहद शर्मनाक है।"

आगे की कानूनी कार्रवाई

आरोपी श्रीमती संदीपा वोहरा को गिरफ्तार कर लिया गया है। एसीबी की टीम अब पूर्व में ली गई ₹40,000 की रिश्वत के मामले की भी गहन जांच कर रही है। साथ ही, अन्य कर्मचारियों से भी रिश्वत लेने के और मामलों की पड़ताल की जा रही है

· आरोपी: संदीपा वोहरा (शाखा प्रबंधक, ESIC, चित्तौड़गढ़)

· पीड़ित: L&T का लकवाग्रस्त कर्मचारी

· रिश्वत राशि: ₹10,000 (रंगे हाथ गिरफ्तारी के समय) + पहले ₹40,000

· कार्रवाई तिथि: 30 मई

· गिरफ्तारी स्थल: चित्तौड़गढ़ ESIC कार्यालय

· जांच एजेंसी: ACB स्पेशल यूनिट, उदयपुर

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भ्रष्टाचार किसी हद तक नहीं रुकता, लेकिन एसीबी जैसी एजेंसियां सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं। उम्मीद है कि आरोपी प्रबंधक को जल्द से जल्द सजा मिलेगी, जिससे अन्य रिश्वतखोरों में भी डर पैदा हो।