*एम्बुलेंस में हुई देरी, तो खुद की कार से अधिकरी ने भेजा अस्पताल*
रेलवे अधिकारी ने निभाई देवदूत की भूमिका: एम्बुलेंस में देरी पर निजी कार से पहुंचाया बीमार यात्री को अस्पताल
कटनी रेलवे स्टेशन पर मानवता की मिसाल, डिप्टी एसएस ने समय रहते बचाई जान
विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज/ कटनी। आज कटनी रेलवे स्टेशन पर रेल प्रशासन की सूझबूझ, त्वरित निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदना का अनोखा नजारा देखने को मिला। पटना से बांद्रा जा रही एक्सप्रेस ट्रेन में अचानक बिगड़ी एक यात्री की तबीयत ने पूरे परिवार की चिंता बढ़ा दी, लेकिन वहां मौजूद रेलवे अधिकारी ने अपनी सूझबूझ और मानवीयता से इस संकट को टाल दिया। न केवल उन्होंने समय पर प्राथमिक उपचार दिलाया, बल्कि एम्बुलेंस के इंतजार में समय बर्बाद न करते हुए खुद अपनी निजी कार से मरीज को अस्पताल पहुंचाकर जीवनदान दिया।
ट्रेन के डिब्बे में अचानक बढ़ी आनन-फानन
पटना-बांद्रा एक्सप्रेस ट्रेन में परिवार के साथ यात्रा कर रहे एक मध्यम आयु वर्ग के यात्री की तबीयत अचानक अत्यधिक बिगड़ गई। पसीने से तर और गंभीर पीड़ा से कराहते यात्री को देख परिजन बौखला गए। ट्रेन में कोई डॉक्टर नहीं था और न ही कोई दवा काम कर रही थी। हालात को गंभीर देखते हुए परिजनों ने अगले स्टेशन कटनी पर मरीज को उतारने का फैसला किया। जैसे ही ट्रेन कटनी स्टेशन पर पहुंची, परिजन बीमार यात्री को लेकर प्लेटफॉर्म पर उतरे और इधर-उधर भागने लगे।
समय के खिलाफ जंग – डिप्टी एसएस ने दिखाई सूझबूझ
शोर-शराबा और परिजनों की चीखपुकार सुनकर डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट (कमर्शियल) सत्यनारायण चौधरी मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि मरीज की हालत गंभीर से गंभीरतर होती जा रही है। उन्होंने तुरंत सूझबूझ का परिचय देते हुए अपनी पूरी टीम को सक्रिय कर दिया। सबसे पहले उन्होंने सफाई मित्रों और रेलवे चिकित्सा कक्ष को निर्देशित किया कि बिना देरी किए मरीज को प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) दी जाए। साथ ही 108 एम्बुलेंस और रेलवे चिकित्सक को तुरंत सूचित किया गया।
जब एम्बुलेंस में हुई देरी, तो अधिकारी ने खोली अपनी कार की चाबी
मरीज की स्थिति बेहद नाजुक थी। नाड़ी तेज, सांस फूल रही थी और वह बेहोशी की ओर बढ़ रहा था। इंतजार का एक-एक पल जानलेवा साबित हो सकता था। 108 एम्बुलेंस के आने में अभी और समय लगता दिख रहा था। ऐसे में डिप्टी एसएस चौधरी ने तत्काल निर्णय लिया – उन्होंने परिजनों को आश्वस्त करते हुए बताया कि वे एम्बुलेंस का इंतजार न करें, क्योंकि समय सोने से भी कीमती है। फौरन उन्होंने अपनी निजी कार बुलवाई और मरीज को उसके परिजनों के साथ उसमें बैठाया। खुद भी स्टाफ सहित कार में सवार हुए और जिला सरकारी अस्पताल के लिए रवाना हो गए।
समय पर मिला इलाज, बची जान
अधिकारी की इस सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई के कारण मरीज मात्र कुछ ही मिनटों में अस्पताल पहुंच गया, जहां डॉक्टरों ने इमरजेंसी में उसका इलाज शुरू किया। सूत्रों के अनुसार अब मरीज की स्थिति में सुधार हो रहा है और उसे गहन निगरानी में रखा गया है। यदि अधिकारी कुछ मिनटों की भी देर करते या एम्बुलेंस का इंतजार करते, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
रेलवे की छवि संवारने वाला नायक
डिप्टी एसएस सत्यनारायण चौधरी की इस मानवीय पहल ने न केवल एक परिवार को दुख से बचाया, बल्कि पूरी रेलवे व्यवस्था के प्रति लोगों के मन में विश्वास भी पैदा किया। जहां एक ओर अक्सर बड़ी-बड़ी व्यवस्थाओं में समय पर एम्बुलेंस न पहुंचने की शिकायत होती है, वहीं इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि अगर अधिकारी इरादा करें तो नियमों की बेड़ियों से ऊपर उठकर भी जान बचाई जा सकती है। रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने चौधरी के इस सराहनीय कदम की प्रशंसा की है और माना है कि यह मानवता की सच्ची मिसाल है।
· क्या हुआ: पटना-बांद्रा एक्सप्रेस के यात्री की तबीयत बिगड़ी।
· कहां: कटनी रेलवे स्टेशन पर यात्री को उतारा गया।
· किसने की पहल: डिप्टी एसएस (कमर्शियल) सत्यनारायण चौधरी।
· क्या किया: प्राथमिक उपचार के बाद 108 एम्बुलेंस में देरी पर खुद की निजी कार से मरीज को सरकारी अस्पताल पहुंचाया।
· परिणाम: समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बच गई।