मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने MR 4 लक्ष्मीपुर, संजय नगर में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही पर रोक लगाई
अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता ने लगभग 22 अन्य निवासियों ने न्यायालय में आवेदन पेश कर अपनी बात रखी
विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर, 28 जुलाई 2026। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित MR 4 लक्ष्मीपुर, संजय नगर अतिक्रमण मामले में बड़ी राहत देते हुए अगली सुनवाई तक हटाने की कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अवधि में वहां रह रहे निवासियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी और जिनका बिजली कनेक्शन काटा गया है, उसे तुरंत बहाल किया जाएगा।
यह आदेश आज याचिका क्रमांक WP 29978/2026 पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। यह मामला केसरवानी शिक्षा समिति द्वारा जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से लीज पर ली गई जमीन को खाली कराने के लिए दायर याचिका से संबंधित है।
सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर ने न्यायालय का ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित किया कि केसरवानी शिक्षा समिति और नगर निगम, जबलपुर दोनों की ओर से एक ही वकील पेश हुआ, जिसने 30 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने का आश्वासन (अंडरटेकिंग) दिया था।
इस बीच, हस्तक्षेपकर्ता रविंद्र गुप्ता और लगभग 22 अन्य निवासियों ने न्यायालय में आवेदन पेश कर अपनी बात रखी। उन्होंने दलील दी कि उन्हें 1998 में मध्य प्रदेश नगरीय क्षेत्र के भूमिहीन व्यक्ति अधिनियम, 1984 के तहत वैध पट्टे प्रदान किए गए थे, जो 30 वर्षों के लिए हैं और अभी समाप्त नहीं हुए हैं। आवेदन में कहा गया कि वे लगभग 400 परिवार हैं, जो यहां अपने मकानों में रह रहे हैं और पिछले 20 वर्षों से नगर निगम को कर (टैक्स) जमा कर रहे हैं तथा उनके पास बिजली कनेक्शन भी हैं।
हस्तक्षेपकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि जनप्रतिनिधियों ने इस क्षेत्र में बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने विकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि उन्हें हटाने के बजाय, शासन की धारणाधिकार (लोन) योजना के तहत पट्टा प्रदान किया जा सकता है या ईडब्ल्यूएस (EWS) क्वार्टर आवंटित किए जा सकते हैं, जिसके लिए वे राशि देने को तैयार हैं।
आवेदन में आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा गया कि नगर निगम और विकास प्राधिकरण दोनों ही इस भूमि को अपनी बता रहे हैं और खाली कराने में सहयोग कर रहे हैं, जबकि यह स्थान मूल रूप से 'लक्ष्मीपुर तालाब' के नाम से जाना जाता था और कुल 8 हेक्टेयर भूमि है। उन्होंने कहा कि इस भूमि को आवासीय रूप में विकसित करने का प्रारूप 1990 में ही तैयार कर लिया गया था और वे लोग इससे पहले से यहां रह रहे हैं। अधिकांश परिवार पिछड़े वर्ग एवं अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं।
गौरतलब है कि स्थानीय विधायक अभिलाष पांडे ने भी पीड़ित निवासियों को अन्याय न होने का आश्वासन दिया है। महापौर और जबलपुर विकास प्राधिकरण ने भी गैर-पट्टाधारियों को वैकल्पिक जमीन या ईडब्ल्यूएस फ्लैट देने की बात कही है।
न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह अंतरिम आदेश पारित किया। अगली सुनवाई 28 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
हस्तक्षेप आवेदन पेश करने वाले प्रमुख निवासियों में शामिल हैं:
आरती कुशवाहा, बहादुर पुत्र संतोष लाल, सुरेश कुमार गुप्ता, सम्राट कविलकर, राम आसरे पटेल, लक्ष्मी पटेल, सोने नमर लाल, भोले राम पटेल, मीना कुशवाहा, लखन लाल, राजा राम, गुरु चरन, भूरा, गोलू कोल, शोभना सोंथिया, प्रीति पटेल, रवि पटेल और रमेश पटेल।