सीएम डॉ. मोहन यादव ने हलाली डैम में छोड़े दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध - Bhaskar Crime

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सीएम डॉ. मोहन यादव ने हलाली डैम में छोड़े दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध

*जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम: देशभर के पर्यावरण प्रेमियों के लिए उत्साहवर्धक है*

*सीएम डॉ. मोहन यादव ने हलाली डैम में छोड़े दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध*

विशेष रिपोर्टर भोपाल/रायसेन: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में दुर्लभ प्रजाति के 5 गिद्धों को प्रकृति के आगोश में छोड़कर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है। यह घटना न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के पर्यावरण प्रेमियों के लिए उत्साहवर्धक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि जैव विविधता की रक्षा करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी कहे जाते हैं। ये मृत पशुओं के शवों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं और गंभीर बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका को देखते हुए उनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। प्रदेश सरकार गिद्धों की घटती संख्या पर चिंतित है और उनके संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठा रही है।"

पारिस्थितिकी तंत्र के लिए वरदान हैं गिद्ध:

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। वे मृत जानवरों के शवों को खाकर न केवल जमीन को साफ रखते हैं बल्कि सड़ते शवों से पैदा होने वाले रोगाणुओं और संक्रामक बीमारियों को फैलने से भी रोकते हैं। पिछले कुछ दशकों में गिद्धों की संख्या में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन की आशंका बढ़ गई थी। ऐसे में हलाली डैम जैसे प्राकृतिक आवास में इन दुर्लभ गिद्धों को छोड़ा जाना एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।

सरकार का संरक्षण कार्यक्रम:

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गिद्धों की घटती संख्या को देखते हुए एक व्यापक संरक्षण और पुनर्वास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाना, प्रजनन केंद्र स्थापित करना और उनके लिए भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। हलाली डैम क्षेत्र, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, इन गिद्धों के लिए एक सुरक्षित और उपयुक्त आवास साबित हो सकता है।

इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री के इस कदम की स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरणविदों ने सराहना की है और इसे प्रकृति संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया है।