*बिजली उपभोक्ताओं एवं कर्मचारियों के प्रति शासन संवेदनशील : विशेष गढ़पाले*
चीफ एडिटर/ मध्यप्रदेश शासन के ऊर्जा सचिव एवं पावर मैनेजमेंट कंपनी के सीएमडी विशेष गढ़पाले ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता सभी वर्गों के बिजली उपभोक्ताओं को निर्धारित मानकों के अनुसार सतत एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। साथ ही, बिजली कंपनियों में कार्यरत सभी श्रेणियों के कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के प्रति शासन पूर्ण रूप से संवेदनशील है।
यह बातें श्री गढ़पाले ने मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा के दौरान कहीं। फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी.पी. पाठक के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ऊर्जा सचिव का शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। संघ ने हाल ही में लाइन परिचारकों की सेवानिवृत्ति आयु 55 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने तथा वेतन विसंगति दूर करने जैसे निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मण्लोई तथा सभी प्रबंध निदेशकों का आभार व्यक्त किया।
कर्मचारियों एवं पेंशनर्स की समस्याओं पर अनुरोध पत्र
महामंत्री राकेश पाठक ने श्री गढ़पाले को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कई प्रमुख माँगें रखी गईं। इन माँगों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। प्रमुख माँगें इस प्रकार हैं:
· संविदा कर्मियों का नियमीकरण : बिजली कंपनियों में कार्यरत संविदा कर्मियों को नियमित करने एवं उनका संविलयन किए जाने की माँग।
· आउटसोर्स कर्मियों को 50% आरक्षण : आउटसोर्स कर्मियों के लिए होने वाली भर्तियों में 50 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें नियमित किया जाए।
· अनुकंपा नियुक्ति नियमित करें : संविदा आधार पर हुई अनुकंपा नियुक्तियों को बिना शर्त नियमित किया जाए तथा ‘कार्यालय सहायक (तीन)’ का पद यथावत रखा जाए।
· एक बार गृह जिला स्थानांतरण : तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी तथा संविदा कर्मचारियों के लिए एक बार गृह जिला स्थानांतरण की नीति बनाई जाए।
· लाइन परिचारक एवं परीक्षण सहायक को जेई (वितरण) के पद पर अवसर : उच्च शिक्षित कार्मिकों (लाइन परिचारक, परीक्षण सहायक) को सीधी भर्ती में कनिष्ठ अभियंता (वितरण) के पद आरक्षित किए जाएं तथा वे परीक्षा देने के पात्र हों।
· आउटसोर्स कर्मियों के लिए अलग निगम : हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मप्र विद्युत क्षेत्र में आउटसोर्स कर्मियों के लिए एक अलग निगम या कंपनी बनाई जाए। केवल पूर्ण शिक्षित एवं प्रशिक्षित व्यक्तियों को ही आउटसोर्स के माध्यम से रखा जाए।
· 20 लाख का बीमा : तकनीकी कार्य करने वाले सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का 20 लाख रुपये का बीमा कराया जाए।
· पुराने मृत्यु प्रकरणों में अनुकंपा नियुक्ति : वर्ष 2000 से 2012 के बीच सामान्य मृत्यु हुए कर्मचारियों के आश्रितों को नियमित अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
· बिजली बिल में 50% छूट : संविदा/नियमित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को पूर्व की भाँति बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट दी जाए।
· 2018 के बाद के कार्यालय सहायकों का वेतन : 2018 व बाद में नियुक्त कार्यालय सहायकों का मूल वेतन पूर्व निर्धारित वेतनमान पर किया जाए, क्योंकि अभी उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के समान वेतन दिया जा रहा है, जो अनुचित है।
· समान कार्य समान वेतन लागू करें : उच्च न्यायालय के निर्णयानुसार शीघ्र ही बिजली कंपनियों में 70, 80, 90 प्रतिशत वेतन के स्थान पर नियुक्ति दिनांक से पूरा वेतन दिया जाए।
· राज्य बटवारे की धारा 49/6 से मुक्ति : वर्ष 2000 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को धारा 49/6 के दायरे से मुक्त रखा जाए।
· पेंशन की गारंटी : बिजली कंपनियों में कार्यरत एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों की पेंशन की गारंटी राज्य सरकार लेने की कृपा करे।
अभिनंदन में उपस्थित प्रमुख कार्यकर्ता
इस अवसर पर फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी.पी. पाठक के साथ यू.के. पाठक, दिनेश दुबे, उमाशंकर दुबे, विमल महापात्र, अनूप वर्मा, राजेश मिश्रा, मोहित पटेल, योगेश पटेल, अक्षय श्रीवास्तव, संजय सिंह, अजय चौबे, एस.के. मिश्रा, एस.के. दुबे सहित फेडरेशन के अन्य साथी उपस्थित रहे।
श्री गढ़पाले ने आश्वासन दिया कि फेडरेशन द्वारा दिए गए पत्र एवं माँगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शासन सभी वर्गों के कर्मियों के हित में सकारात्मक निर्णय लगातार ले रहा है।
