*नौतपा से पहले ही तपने लगी धरती: मध्य प्रदेश में लू और गर्म हवा का कहर, 42 जिलों में अलर्ट*
*रेड अलर्ट कई जिले को मौसम विभाग ने घोषित किया कहा परेशानी या जानलेवा हो सकती है*
चीफ एडिटर जबलपुर/भोपाल, इस बार नौतपा (गर्मी के नौ दिन) की आधिकारिक शुरुआत से पहले ही मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में पारा लगातार ऊपर चढ़ रहा है और लू के थपेड़ों ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। खासतौर पर जबलपुर, खजुराहो, ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग में गर्मी का प्रकोप और भी गंभीर रूप ले चुका है।
31 मई तक नहीं मिलेगी राहत
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भोपाल केंद्र के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट की कोई संभावना नहीं है। विभाग ने साफ किया है कि 31 मई तक पूरे प्रदेश में गर्मी अपने चरम पर रहेगी। लगातार बढ़ते तापमान के साथ गर्म हवाओं (लू) के कारण हीटवेव की स्थिति और विकराल होती जा रही है। कई शहरों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जो सामान्य से 5 से 6 डिग्री अधिक है।
कहां कैसा अलर्ट? रेड से ऑरेंज तक का स्तर
मौसम विभाग ने शनिवार के लिए राज्य के 42 जिलों में हीटवेव अलर्ट जारी किया है, जिसमें स्थिति की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग रंग कोड निर्धारित किए गए हैं:
· रेड अलर्ट (बेहद गंभीर - कोई राहत नहीं):
टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में अत्यधिक गर्मी के चलते रेड अलर्ट घोषित किया गया है। यहां तापमान सबसे अधिक दर्ज किया जा रहा है। लोगों को सख्त हिदायत दी गई है कि दिन के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। यहाँ परेशानी जानलेवा स्तर तक पहुँच सकती है।
· ऑरेंज अलर्ट (गंभीर - बेहद सतर्क रहें):
कुल 21 जिलों को ऑरेंज अलर्ट के दायरे में रखा गया है। इनमें ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, गुना, नीमच, सागर, दमोह, सतना और रीवा प्रमुख हैं। यहाँ भीषण लू चलने और तापमान के सामान्य से काफी अधिक रहने का पूर्वानुमान है। बिना जरूरत बाहर निकलना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
· येलो अलर्ट (सतर्कता जरूरी):
बाकी बचे कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहाँ हीटवेव की स्थिति बन सकती है और बुजुर्गों, बच्चों व बीमारों को विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
क्यों बढ़ रही है परेशानी? जानें कारण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं होने के कारण राहत देने वाली हवाओं की आवक रुकी हुई है। साथ ही, वातावरण में नमी की भारी कमी और रेगिस्तान से आ रही गर्म हवाएं (गर्म शुष्क हवाओं का आगमन) पूरे प्रदेश में हीटवेव का भयंकर रूप ले रही हैं। दिन के समय तेज धूप के साथ चलने वाली लू सीधे स्वास्थ्य पर हमला करती है।
इन पर अधिक खतरा
विशेषज्ञों की मानें तो इस तपती गर्मी में बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी बीमारी (हृदय, किडनी, डायबिटीज आदि) से ग्रसित लोग सबसे अधिक असुरक्षित हैं। लू लगने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण), चक्कर आना, उल्टी और बेहोशी तक की स्थिति पैदा हो सकती है।
प्रशासन और शहरों पर असर
प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। अस्पतालों में ओआरएस और आइस पैक सहित आपातकालीन सेवाएं बढ़ा दी गई हैं। जबलपुर, ग्वालियर, सागर सहित प्रमुख शहरों के बाजार और सड़कें दिन में सुनसान नजर आ रही हैं। दोपहर बारह से शाम चार बजे के बीच दुकानों व सार्वजनिक स्थानों पर सन्नाटा पसरा है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे किसान चिंतित हैं।
कैसे बचें? विभाग की ये सलाह जरूर मानें:
प्रशासन और मौसम विभाग ने नागरिकों से निम्नलिखित सावधानियों का पालन करने का आग्रह किया है:
1. दोपहर 12 से 3 बजे तक बिना काम के बाहर न निकलें।
2. अधिक से अधिक पानी, छाछ, लस्सी और ओआरएस का सेवन करें।
3. हल्के रंग के सूती व ढीले-ढाले कपड़े ही पहनें। सिर को गीले कपड़े, छाते या टोपी से ढकें।
4. पालतू जानवरों को भी छाया में रखें और उन्हें पर्याप्त पानी दें।
5. लू का लक्षण दिखने (तेज बुखार, सिरदर्द, मतली, त्वचा का लाल होना) पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
आगे क्या?
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल मौसम के पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव नहीं आ रहा है। अगले कुछ दिनों तक गर्मी और लू का यह सिलसिला जारी रहेगा। इससे पहले कि नौतपा (जून की शुरुआत में 9 दिनों की अत्यधिक गर्मी की अवधि) आधिकारिक तौर पर शुरू हो, मध्य प्रदेश पहले ही भीषण गर्मी की चपेट में आ चुका है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और यदि आवश्यक हुआ तो और सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे। फिलहाल, प्रदेशवासियों के लिए शीतलक (कूलर), पंखे और पानी ही सबसे बड़े सहारा हैं।