*नदी की छाती चीर रहे रेत माफिया, प्रशासन की मौन स्वीकृति से जारी है अवैध खनन*
*पर्यावरण दिवस पर शर्मनाक सच्चाई जहाँ भाषणों में बचाने की बात, धरातल पर बिगाड़ने का खेल*
विशेष रिपोर्टर मैहर (रामनगर): पर्यावरण दिवस पर जहां दुनिया पेड़ लगाने और नदियां बचाने की शपथ ले रही है, वहीं मैहर जिले के रामनगर तहसील स्थित ग्राम कुबरी में नदी की छाती चीरकर रेत निकालने का अभियान बेरोकटोक जारी है। यह सिलसिला न तो कानून रोक पा रहा है और न ही प्रशासन की कार्रवाई।
शिकायतें दफन, माफियाओं को संरक्षण
जनपद सदस्य राजेंद्र सिंह (मुन्ना) ने रामनगर थाना, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर, आईजी और आयुक्त तक शिकायतें भेजीं — लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ लगी। ऐसा लगता है कि शिकायतों की फाइलें भी रेत के ढेर में कहीं दफन हो गईं। अवैध उत्खनन को रोकने के बजाय प्रशासन की मौन स्वीकृति ने माफियाओं के हौसले और बढ़ा दिए।
पर्यावरण पर गंभीर खतरा
· नदी का स्वरूप पूरी तरह बिगड़ चुका है
· भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है
· कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है
· जैव विविधता प्रभावित हुई है
· धूल और प्रदूषण ने पूरे इलाके में साम्राज्य जमा लिया है
बड़ा सवाल: यदि प्रशासन पर्यावरण संरक्षण का दावा करता है, तो कुबरी की नदी, उसका घटता जलस्तर, बिखरते किनारे और उठती धूल — आखिर किसकी गवाही दे रहे हैं? पर्यावरण दिवस के भाषणों और जमीनी हकीकत के बीच बहती यह रेत बहुत कुछ कह रही है... बस सुनने की इच्छा चाहिए।
जागरूक नागरिकों से अपील: इस मामले को सोशल मीडिया पर जोरदार तरीके से उठाएं, #SaveKubariRiver और #RetMafiaStop जैसे हैशटैग के साथ वायरल करें। तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। RTI के माध्यम से जवाब मांगें।
"जब तक आवाज नहीं उठेगी, तब तक नदियां बहती रहेंगी — बस रेत के बोझ तले दबकर।"
