सीएम मोहन यादव का 'मनमोहन' अंदाज: स्कूल के पहले दिन छात्राओं को दुलार कर दिया आशीर्वाद - Bhaskar Crime

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सीएम मोहन यादव का 'मनमोहन' अंदाज: स्कूल के पहले दिन छात्राओं को दुलार कर दिया आशीर्वाद

सीएम मोहन यादव का 'मनमोहन' अंदाज: स्कूल के पहले दिन छात्राओं को दुलार कर दिया आशीर्वाद,


             एमपी में ड्रॉपआउट दर हुई शून्य

 मनमोहन अंदाज में मोहन यादव ने स्कूल के पहले दिन छात्राओं से सीधा संवाद किया

चीफ एडिटर भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश के स्कूलों में 18 जून से नए शैक्षणिक सत्र की रौनक लौट आई है। राज्य में 'प्रवेशोत्सव कार्यक्रम' के दूसरे चरण की शुरुआत के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर के शासकीय शारदा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे। यहाँ सीएम का एक बेहद आत्मीय और 'मनमोहन' रूप देखने को मिला, जहाँ उन्होंने स्कूल की छात्राओं से सीधा संवाद किया, किसी को प्यार से दुलारा तो किसी के सिर पर हाथ रखकर उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।

सीएम की स्कूल यात्रा: प्रवेशोत्सव में चार चाँद

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शासकीय शारदा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुँचना एक सामान्य औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके शिक्षा-प्रेम और बच्चों के प्रति उनके हार्दिक लगाव की मिसाल था। जैसे ही सीएम स्कूल परिसर में दाखिल हुए, छात्राओं की आँखों में चमक और चेहरों पर मुस्कान बिखर गई। सीएम ने न केवल कक्षाओं का दौरा किया, बल्कि हर छात्रा से व्यक्तिगत रूप से बातचीत भी की।

 बच्चों का हौसला बढ़ाया, सवालों के दिए बेबाक जवाब

मुख्यमंत्री के स्कूल पहुँचते ही छात्राएँ बेहद उत्साहित नज़र आईं। डॉ. यादव ने उनसे उनकी पढ़ाई, परीक्षा, विज्ञान प्रयोगों और शिक्षा में आने वाली कठिनाइयों के बारे में जानकारी ली। खास बात यह रही कि उन्होंने स्कूल की प्रयोगशाला (लैब) का बारीकी से निरीक्षण किया और विज्ञान से जुड़े सवाल पूछे। छात्राओं ने बिना किसी घबराहट के सभी सवालों के बेबाक जवाब दिए, जिससे प्रभावित होकर मुख्यमंत्री ने उनकी पीठ थपथपाई और उनकी प्रतिभा की सराहना की।

"मुझे बहुत खुशी है कि आप सभी इतनी मेहनती और आत्मविश्वासी हैं। आपका उज्ज्वल भविष्य ही मध्यप्रदेश की नींव है," — ये शब्द सीएम ने कहकर छात्राओं का मनोबल बढ़ाया।

मध्यप्रदेश की शिक्षा क्रांति: बड़ी उपलब्धियाँ

निरीक्षण के दौरान मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर दो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ साझा कीं, जिन्होंने पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है:

1. प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य — देश के लिए मिसाल

"बीते तीन वर्षों में प्राथमिक शिक्षा स्तर पर मध्यप्रदेश में ड्रॉपआउट दर पूरी तरह से शून्य हो गई है। यह हमारी सरकार की योजनाओं और शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है।"

सीएम ने गर्व से यह घोषणा की कि राज्य सरकार की सतत कोशिशों से अब कोई भी बच्चा प्राथमिक शिक्षा से वंचित नहीं रहा। यह आँकड़ा मध्यप्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि देश के कई बड़े राज्य आज भी ड्रॉपआउट दर की चुनौती से जूझ रहे हैं।

2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में अग्रणी मध्यप्रदेश

सीएम डॉ. यादव ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी और सफल क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में अपनी जगह बना चुका है। NEP के तहत हो रहे बदलावों को सबसे कारगर ढंग से लागू करने के लिए मध्यप्रदेश को अन्य राज्यों के लिए एक रोल मॉडल माना जा रहा है।

 सुगम प्रवेश प्रक्रिया: रिकॉर्ड 19.6% की बढ़ोतरी

मध्यप्रदेश सरकार ने इस साल शासकीय स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सरल और सुगम बनाया है, जिसके सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं:

 नामांकन में जबरदस्त उछाल:

· कुल नामांकन में वृद्धि: 19.6% की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।

· शासकीय विद्यालयों में प्रगति: 32.4% की शानदार बढ़ोतरी हुई है, जो दर्शाती है कि अभिभावकों का शासकीय स्कूलों पर भरोसा बढ़ा है।

 महत्वाकांक्षी लक्ष्य:

· इस शैक्षणिक सत्र में सरकार ने 1 करोड़ 45 लाख नामांकन का लक्ष्य रखा है, जो राज्य के इतिहास में सबसे बड़ा है।

 गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई पहल:

· मध्यप्रदेश में 369 भव्य सांदीपनि विद्यालय शुरू किए गए हैं, जो आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शिक्षण पद्धतियों से लैस हैं।

"सरल प्रवेश नीतियों, ऑनलाइन पंजीकरण और पारदर्शी आवंटन व्यवस्था के कारण ही आज नामांकन में इतनी बड़ी वृद्धि हुई है। हमारा लक्ष्य हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है," — यह बात सीएम ने कहकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

 प्रवेशोत्सव: एक जन-आंदोलन का रूप

राज्य सरकार द्वारा 'प्रवेशोत्सव' को केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन के रूप में मनाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत न केवल नए छात्रों का स्वागत किया जाता है, बल्कि अभिभावकों को भी शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जाता है।

प्रवेशोत्सव की खासियतें:

· हर स्कूल में रंग-बिरंगे गेट, गुब्बारे और स्वागत गीतों से बच्चों का स्वागत किया गया।

· बच्चों को किताबें, यूनिफॉर्म और शिक्षा सामग्री मुफ्त वितरित की गई।

· शिक्षकों ने अभिभावकों को बच्चों की नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया।

 सीएम का संदेश: शिक्षा है सबसे बड़ा अधिकार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि "शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और हमारी सरकार इस अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह समर्पित है।" उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों में नवाचार, विज्ञान और कला के प्रति रुचि पैदा करें ताकि वे भविष्य में देश के लिए संपदा बन सकें।

सीएम ने यह भी कहा कि "हमने इस सत्र में 369 सांदीपनि विद्यालय शुरू किए हैं, जहाँ बच्चों को देश की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। हमारा उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा अशिक्षित न रहे और हर बच्चा अपने सपनों को पूरा कर सके।"

 एक नज़र में मुख्य आँकड़े:

विवरण आँकड़े

ड्रॉपआउट दर (प्राथमिक स्तर) शून्य

कुल नामांकन लक्ष्य (2026-27) 1 करोड़ 45 लाख

नामांकन में कुल वृद्धि 19.6%

शासकीय विद्यालयों में वृद्धि 32.4%

नए सांदीपनि विद्यालय 369

NEP क्रियान्वयन में स्थान देश में अग्रणी

भविष्य की योजना: शिक्षा में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि "हमारी योजना आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में देश का सबसे आत्मनिर्भर राज्य बनाने की है।" उन्होंने कहा कि स्कूलों में डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट क्लासेस, और कौशल विकास कार्यक्रमों को और बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके अलावा, राज्य सरकार ने "स्कूल चलें हम अभियान" को और तेज़ करने की योजना बनाई है, जिसमें गाँव-गाँव जाकर अभिभावकों को उनके बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा।

 शिक्षकों और अभिभावकों को धन्यवाद

सीएम ने अंत में शिक्षकों और अभिभावकों का आभार व्यक्त किया कि उनके सहयोग से ही मध्यप्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में यह मुकाम हासिल कर पाया है। उन्होंने कहा कि "आप सभी के प्रयासों ने ही इस सपने को साकार किया है कि हर बच्चा स्कूल में है और हर बच्चा पढ़ रहा है।"

निष्कर्ष:

मध्यप्रदेश के शिक्षा परिदृश्य में यह दिन ऐतिहासिक रहेगा — जब मुख्यमंत्री ने खुद स्कूल जाकर बच्चों का हौसला बढ़ाया, प्रवेशोत्सव को एक उत्सव बनाया, और शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की बड़ी उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा। ड्रॉपआउट दर का शून्य होना, नामांकन में रिकॉर्ड वृद्धि और NEP में अग्रणी होना — ये सभी उपलब्धियाँ सिर्फ आँकड़े नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक बड़ा कदम हैं।

"आज का बच्चा ही कल का मध्यप्रदेश है  और हम उसे सशक्त, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव