महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती को लेकर बड़ा बदलाव और नई व्यवस्था - Bhaskar Crime

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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती को लेकर बड़ा बदलाव और नई व्यवस्था

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती को लेकर बड़ा बदलाव और नई व्यवस्था

अब एक मोबाइल नंबर से तीन माह में सिर्फ एक बार मिलेगी एंट्री, जानें पूरी गाइडलाइन

विशेष संवाददाता उज्जैन | उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सुबह-सुबह होने वाली दिव्य भस्म आरती के दर्शन को लेकर मंदिर समिति ने एक सख्त और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब श्रद्धालु अपने एक मोबाइल नंबर का उपयोग तीन महीने (त्रैमासिक) की अवधि में केवल एक बार ही भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति (पास) प्राप्त करने के लिए कर सकेंगे। यह नई व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई है।

क्या है नई व्यवस्था 

मंदिर समिति के अनुसार, अब ऑनलाइन प्रोटोकॉल के माध्यम से पंजीकरण कराने वाले सभी मोबाइल नंबरों पर यह त्रैमासिक सीमा लागू होगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि किसी श्रद्धालु ने आज (जून, 2026 में) भस्म आरती के लिए बुकिंग कराई है, तो वही मोबाइल नंबर अगले सितंबर, 2026 से पहले पुनः बुकिंग के लिए मान्य नहीं होगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को इस पावन अवसर का लाभ उठाने का समान अवसर प्रदान करना है।

दरअसल, आखिर यह निर्णय क्यों लिया गया

मंदिर समिति के अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से मंदिर प्रशासन को बार-बार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ विशेष मोबाइल नंबरों का उपयोग करके हर महीने लगातार भस्म आरती की बुकिंग कराई जा रही है। इससे वास्तविक और जरूरतमंद श्रद्धालुओं को आरती में शामिल होने में कठिनाई हो रही थी, और बुकिंग स्लॉट्स पर एकाधिकार जैसी स्थिति बन रही थी। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए समिति ने इस नियम को पुनः प्रभावी और अधिक सख्ती से लागू करने का फैसला किया है।

क्या थी पुरानी व्यवस्था

इस व्यवस्था का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। करीब दो वर्ष पहले (लगभग 2024 से पहले) तक श्रद्धालु भस्म आरती की बुकिंग 30 दिन पहले ऑनलाइन करा सकते थे, और उस समय मोबाइल नंबर से जुड़ी कोई विशेष समय-सीमा (अंतराल) नहीं थी।

हालांकि, वर्ष 2024 में अनुमति प्रक्रिया को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने एक बड़ा फैसला लिया था। उस समय यह नियम बनाया गया था कि एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर के आधार पर तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति दी जाएगी। यह व्यवस्था कुछ समय तक प्रभावी रही, लेकिन बाद में अज्ञात कारणों से इसे बंद कर दिया गया था।

अब फिर से क्यों लागू हुआ नियम

हाल के दिनों में फिर से बुकिंग को लेकर अनियमितताओं के मामले सामने आने लगे। शिकायतों में यह बात उजागर हुई कि कुछ लोग तय सीमा से अधिक बार आरती का लाभ उठा रहे हैं, जिससे नए और दूर-दराज से आने वाले भक्तों को वंचित होना पड़ रहा है। इसलिए, मंदिर समिति ने एक बार फिर उस पुराने नियम को लागू करने का निर्णय लिया है और अब इसे अधिक पारदर्शी व प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। समिति का स्पष्ट कहना है कि अब किसी भी श्रद्धालु को हर माह भस्म आरती की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्या है इस व्यवस्था का उद्देश्य

मंदिर प्रशासन का मानना है कि महाकाल की भस्म आरती सिर्फ एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इस नई पाबंदी का मुख्य लक्ष्य 'सबके लिए समान अधिकार' सुनिश्चित करना है। इससे न सिर्फ ब्लैक-मार्केटिंग और बुकिंग में होने वाली धांधली पर रोक लगेगी, बल्कि जो भक्त सच्ची लगन से वर्षों से इस आरती के दर्शन का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें भी सुनहरा मौका मिल सकेगा।

क्या होगा यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता है?

हालांकि समिति ने उल्लंघन पर सीधी सजा की घोषणा नहीं की है, लेकिन नई ऑनलाइन व्यवस्था तकनीकी रूप से इतनी सशक्त होगी कि सिस्टम स्वतः ही 90 दिनों के भीतर पुराने मोबाइल नंबर को बुकिंग के लिए अस्वीकार कर देगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इस नियम का ध्यान अवश्य रखें, ताकि ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान कोई तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।

इस फैसले का स्वागत करते हुए अधिकांश भक्तों का कहना है कि इससे अब महाकाल की भस्म आरती अधिक सुलभ और व्यवस्थित हो सकेगी। मंदिर समिति ने आश्वासन दिया है कि वे श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन पोर्टल को और बेहतर बनाएंगे।