कलेक्टर बने शिक्षक: जब फाइलें छोड़, बच्चों के बीच बैठकर पढ़ाया पाठ, सुनाए सपनों के मंत्र
विशेष रिपोर्टर कटनी | व्यस्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों और सरकारी फाइलों की भीड़ के बीच गुरुवार का दिन कुछ अलग नजर आया। जिला मुख्यालय की सत्ता और प्रशासनिक गलियारों को पीछे छोड़, कलेक्टर आशीष तिवारी जब शासकीय माध्यमिक शाला रॉबर्ट लाइन, माधवनगर पहुंचे, तो पूरा विद्यालय मानो नई ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा। उन्होंने कलेक्टर की कुर्सी नहीं, बल्कि एक साधारण शिक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए बच्चों के साथ बैठकर पाठ पढ़ाया, सवाल-जवाब किए और उनके सपनों को नई उड़ान दी।
'स्कूल चलें हम' अभियान के तहत अनोखी पहल'
'स्कूल चलें हम अभियान' के अंतर्गत आयोजित शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में कलेक्टर तिवारी ने बच्चों से बेहद आत्मीय अंदाज में संवाद किया। उन्होंने पहली कक्षा के बच्चों से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों से सीधा संवाद स्थापित किया और पूछा —
"बड़े होकर क्या बनना चाहते हो"
इस सवाल ने जहां बच्चों के चेहरों पर चमक भर दी, वहीं उनके जवाबों ने पूरे कमरे को देशभक्ति और जुनून से सराबोर कर दिया।
· किसी ने सैनिक बनकर देश की सरहदों की रक्षा करने की इच्छा जताई,
· तो किसी ने डॉक्टर बनकर मानवता की सेवा करने का सपना देखा,
· कुछ बच्चों ने शिक्षक, इंजीनियर, और पुलिस अधिकारी बनने का संकल्प भी सुनाया।
कलेक्टर के मंत्र: 'मेहनत, अनुशासन और लगन ही सफलता की कुंजी'
बच्चों के सपनों को सुनकर कलेक्टर ने उन्हें समझाया — "सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलना कठिन है। और इस कठिन काम को आसान बनाती है — कठिन परिश्रम, अनुशासन और निरंतर अध्ययन की आदत।"
उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य तय करें और उसे पाने तक पूरी लगन से जुटे रहें। "जब तक आप नियमित विद्यालय नहीं आएंगे, ध्यान से नहीं पढ़ेंगे और अपने शिक्षकों तथा माता-पिता का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक सफलता आपके कदम नहीं चूमेगी।"
संवाद में क्विज और जिज्ञासा को बढ़ावा
कलेक्टर ने पुलिस और सेना की जिम्मेदारियों पर भी सवाल पूछे, जिनका बच्चों ने आत्मविश्वास से जवाब दिया। बच्चों की जवाबदेही और समझ को देख कलेक्टर ने उनकी जमकर तारीफ की।
इसके बाद, उन्होंने पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए मौसमों पर चर्चा शुरू की और सरल उदाहरण देकर लीप वर्ष की अवधारणा को इतनी सहजता से समझाया कि छोटे बच्चे भी 'वो 29 फरवरी क्यों आता है?' जैसे सवालों को खुद समझने लगे।
जब उन्होंने पूछा "तुम्हें कौन सा मौसम सबसे अच्छा लगता है?" तो अधिकांश बच्चों ने मुस्कुराते हुए सर्दी का मौसम बताया। इस जवाब पर कलेक्टर भी मुस्करा पड़े और बोले — "सर्दी में तो पढ़ाई भी मजेदार लगती है, बशर्ते कंबल के अंदर किताब भी हो!" — इस पर बच्चे ठहाके लगाने लगे।
चॉकलेट-कॉपी-पेन से बढ़ा उत्साह
सही उत्तर देने वाले हर बच्चे को कलेक्टर ने अपने हाथों से चॉकलेट, पेन, पेंसिल, कॉपी, स्केल और रबर भेंट किए। उपहार पाते ही बच्चों के चेहरे खुशी से दमक उठे। यह देखना वाकई काबिल-ए-तारीफ था कि एक जिला प्रशासक कैसे बच्चों के छोटे-छोटे हौसलों को इतनी सहजता से बड़ा कर रहा था।
कलेक्टर ने सभी बच्चों को शपथ दिलाई कि — "हर दिन विद्यालय आएंगे, मन लगाकर पढ़ाई करेंगे और अपने बड़ों का सम्मान करेंगे।"
छात्रावास पहुंचकर जाना हाल, बांटे स्कूल बैग
विद्यालय भ्रमण के बाद कलेक्टर ने रॉबर्ट लाइन स्थित बालक छात्रावास का भी औचक निरीक्षण किया। यहां उन्होंने बच्चों के रहन-सहन, खान-पान, पढ़ाई और दैनिक दिनचर्या की बारीकी से जानकारी ली।
छात्रों को स्कूल बैग वितरित करते हुए उन्होंने छात्रावास की सुविधाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को "बिस्तर, पानी, साफ-सफाई और खाने की गुणवत्ता" को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चे यहां परिवार से दूर हैं, इसलिए प्रशासन को उनके 'दूसरे परिवार' के रूप में हर संभव सुविधा सुनिश्चित करनी चाहिए।
'एक पेड़ मां के नाम' से प्रकृति का दिया संदेश
इस मौके पर कलेक्टर आशीष तिवारी ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत विद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा —
"जिस तरह मां हमें जन्म देती है, गोद देती है और हमारी रक्षा करती है, ठीक उसी तरह पेड़ भी हमें ऑक्सीजन, छाया और जीवन देते हैं। इसलिए हर बच्चे को अपने जीवनकाल में कम से कम एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए और उसे अपनी संतान की तरह पालना-पोसना चाहिए।"
बच्चों ने भी इस अभियान को अपनाने का संकल्प लिया और परिसर में पौधे लगाकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी ली।
मौके पर मौजूद गणमान्य अधिकारी
इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी सच्चिदानंद पांडे, जिला परियोजना समन्वयक प्रेमनारायण तिवारी, सहायक संचालक राजेश अग्रहरि, एडीपीसी अभय जैन सहित अन्य शिक्षकगण और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने कलेक्टर के साथ मिलकर बच्चों के उत्साहवर्धन में योगदान दिया।
100 से अधिक अधिकारियों ने निभाई प्रेरक की भूमिका
गौरतलब है कि 'स्कूल चलें हम अभियान' के तहत कटनी जिले के 100 से अधिक प्रशासनिक अधिकारियों ने अलग-अलग विद्यालयों में जाकर शिक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल बच्चों का मार्गदर्शन किया, बल्कि उनके सवालों का जवाब देकर उन्हें प्रेरित भी किया। इस अनोखी पहल का उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना और उन्हें बताना है कि — "शिक्षा ही वह हथियार है, जिससे आप दुनिया बदल सकते हैं।"
अंत में एक बात और...
कलेक्टर तिवारी का यह कदम एक संदेश है कि वास्तविक शिक्षा सिर्फ किताबों के दायरे में नहीं, बल्कि उन अनुभवों में है जो जीवन को संवारते हैं। जब कोई बड़ा अधिकारी बच्चों के बीच बैठकर उनके साथ हंसता है, सवाल करता है और उन्हें उपहार देता है, तो वह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जीवन-परिवर्तनकारी अनुभव बन जाता है।
शायद यही वजह है कि जब कलेक्टर चले गए, तो बच्चों ने एक-दूसरे से कहा — "अगर रोज ऐसे ही पढ़ने को मिले, तो कभी स्कूल छोड़ने का मन ही नहीं करेगा!"