EWD का छापा अधिकारी की काली कमाई की 'पोल' खोल दी" - Bhaskar Crime

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EWD का छापा अधिकारी की काली कमाई की 'पोल' खोल दी"

नगर निगम में ईओडब्ल्यू का भीषण छापा, हैरान कर देने वाली है प्रभारी अधिकारी की दौलत

10 हजार वर्गफुट प्लॉट, आंध्र में खेत, 5 गाड़ियां... 'साधारण' हेल्थ ऑफिसर के नाम पर निकली अरबों की सम्पत्ति

चीफ एडिटर क्राइम भास्कर न्यूज/जबलपुर आय से अधिक संपत्ति की गुमनाम दौड़ में आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने मंगलवार की सुबह शहर के नगर निगम में बड़ा एक्शन लिया। सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई ने निगम प्रशासन में हड़कंप मचा दिया, क्योंकि ईओडब्ल्यू की टीम ने एक साथ कई ठिकानों पर दबिश देकर उस अधिकारी की 'पोल' खोल दी, जिसे अब तक 'सामान्य' और 'सीधा' समझा जाता था।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईओडब्ल्यू को नगर निगम के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोला राव के खिलाफ गुप्त शिकायत मिली थी। शिकायत में आरोप था कि सीमित सरकारी वेतन पाने वाले पोला राव ने अवैध तरीकों से अपार संपत्ति बना ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एजेंसी ने अदालत से सर्च वारंट हासिल किया और मंगलवार सुबह टीम ने पोला राव के आवास, कार्यालय और उनसे जुड़े एक प्रमुख निगम ठेकेदार के घर पर एक साथ छापेमारी की।

यह 'हटके' और चौंकाने वाला क्यों है?

छापेमारी के दौरान जो प्रारंभिक तथ्य सामने आए हैं, वे किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं हैं। सरकारी अधिकारी होने का लेबल ओढ़े पोला राव के नाम पर संपत्तियों की लिस्ट इतनी लंबी है कि अब तक की सभी जांचों को टक्कर देती है:

1. रेलवे के भूखंड को मात देने वाली जमीन: शहर के प्रतिष्ठित इलाके में करीब 10,000 (दस हजार) वर्ग फुट का विशाल भूखंड—यानी लगभग एक बड़ा फार्महाउस जितनी जमीन!

2. अंतरराज्यीय कनेक्शन: सिर्फ जबलपुर ही नहीं, बल्कि दूर आंध्र प्रदेश में भी विशाल कृषि भूमि खरीदी गई है। यानी उनका नेटवर्क प्रदेश से बाहर तक फैला है।

3. गाड़ियों का काफिला: उनके गैरेज से 4 दोपहिया (बाइक/स्कूटी) और एक शानदार 4 पहिया (कार) बरामद हुई है।

4. प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो: इन सबके अलावा शहर के बीचो-बीच एक बड़ा फ्लैट भी उनके नाम पर दर्ज मिला है।

ठेकेदार के घर क्यों गई टीम?

सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ईओडब्ल्यू ने निगम के एक ठेकेदार के घर पर भी संयुक्त कार्रवाई की। सूत्रों के मुताबिक, इस ठेकेदार को स्वास्थ्य विभाग के कामकाज में पोला राव की 'पसंदीदा' फर्म माना जाता था। एजेंसी को शक है कि इसी ठेकेदार के जरिए अवैध कमीशन (रिश्वत) का लेन-देन होता था, और इसी पैसे से पोला राव ने आंध्र प्रदेश जाकर भी जमीनें खरीदीं। दोनों ठिकानों पर मिले दस्तावेज़ों में तालमेल बिठाया जा रहा है।

बैंक-बीमा की 'खजाना' भी जब्त:

सिर्फ रजिस्ट्री और गाड़ियां ही नहीं, बल्कि जांच टीम ने पोला राव और उनके करीबियों के कई बैंक खातों, भारी-भरकम बीमा पॉलिसियों, और नकद लेन-देन की फुट-फुट कर जानकारी जुटाई है। इन सभी दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया गया है।

फिलहाल बरामद सभी संपत्तियों (प्रॉपर्टी, व्हीकल, फिक्स्ड डिपॉजिट) का वास्तविक बाजार मूल्यांकन (Valuation) जारी है। ईओडब्ल्यू अफसरों की प्राथमिक टीम पूरे दिन सभी जप्ती आइटम्स का मिलान पोला राव के सरकारी वेतन (सैलरी) और आय के स्रोतों से कर रही है। प्रारंभिक आंकड़ों में आय और संपत्ति की विशाल खाई (Disproportionate Assets) साफ नजर आ रही है। जांच में जैसे-जैसे नए धागे खुलेंगे, निगम में इस बड़े घोटाले और अन्य अधिकारियों-ठेकेदारों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरी पड़ताल के बाद ही अगली कानूनी प्रक्रिया (गिरफ्तारी या चार्जशीट) शुरू होगी।