जल संरक्षण की अनूठी मिसाल,निगमायुक्त ने किया निरीक्षण - Bhaskar Crime

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जल संरक्षण की अनूठी मिसाल,निगमायुक्त ने किया निरीक्षण

*जल संरक्षण की अनूठी मिसाल,निगमायुक्त ने किया निरीक्षण*

*जल संरक्षण की अनूठी पहल: एसीसी खदान में सहेजा जाएगा करोड़ों लीटर वर्षाजल, पर्यटन केंद्र के रूप में होगा विकसित*

निगमायुक्त तपस्या परिहार ने खदान का निरीक्षण कर दिए कड़े निर्देश, गर्मी में पेयजल आपूर्ति को मिलेगी मजबूत

विशेष संवाददाता क्राइम भास्कर न्यूज कटनी। नगर पालिक निगम कटनी ने भविष्य की जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अभूतपूर्व और दूरदर्शी पहल की शुरुआत की है। इसके तहत मानसून के दौरान माधवनगर क्षेत्र में व्यर्थ बहने वाले करोड़ों लीटर वर्षाजल को संरक्षित करने के लिए 'एसीसी खदान क्रमांक-5' को एक आदर्श जल संरक्षण मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण करने के लिए निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार ने अधिकारियों के साथ स्थल का औचक दौरा किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान निगम के उपयंत्री मृदुल श्रीवास्तव भी मौजूद रहे ।

सुरक्षा, हरियाली और पहुंच पर जोर

निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने खदान के चारों ओर मजबूत फेंसिंग (बाउंड्री वॉल) लगाने, पूरे परिसर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने और आवागमन को सुगम बनाने के लिए एप्रोच रोड के निर्माण के निर्देश दिए। इन कदमों से न केवल स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आसपास का वातावरण भी हरा-भरा होगा ।

नया पर्यटन केंद्र होगा विकसित

शहर के प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाने और नागरिकों को एक नया मनोरंजन स्थल देने के उद्देश्य से निगमायुक्त ने इस स्थल को 'पर्यटन केंद्र' के रूप में विकसित करने की योजना पर काम करने को कहा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पर्यटकों की सुविधा के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा, सौंदर्यीकरण और अन्य व्यवस्थाओं की कार्ययोजना शीघ्र तैयार की जाए। इससे कटनी में स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा ।

स्टॉप डैम और ओपन चैनल से खदान तक पहुंचेगा पानी

उपयंत्री मृदुल श्रीवास्तव ने तकनीकी पहलू की जानकारी देते हुए बताया कि माधवनगर क्षेत्र के 7-11 नाले से बहने वाले वर्षाजल को रोकने के लिए पहले से निर्मित स्टॉप डैम से एक 'ओपन चैनल' बनाया गया है। इस चैनल के जरिए बारिश का पानी सीधे एसीसी खदान नंबर-5 में पहुंचेगा, जहां इसे संग्रहित किया जाएगा ।

इसके अलावा, कटाए घाट स्थित कटनी नदी के बैराज के ओवरफ्लो पानी को भी खदानों तक पहुंचाने के लिए मोटर पंप और पाइपलाइन की व्यवस्था की गई है। जरूरत पड़ने पर इस पानी को फिल्टर प्लांट के माध्यम से शोधित कर पेयजल आपूर्ति में इस्तेमाल किया जाएगा 

क्या है इस पहल का महत्व

यह परियोजना न केवल गर्मियों में शहर की पेयजल आपूर्ति को मजबूत करेगी, बल्कि आसपास के भूजल स्तर में भी सुधार करेगी। दरअसल, दुनिया भर में पानी की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। भारत में भी बढ़ती आबादी, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि उपलब्धता सीमित है । ऐसे में वर्षाजल संरक्षण और पुनर्चक्रण जैसे उपाय जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं ।

यह पहल जल संसाधनों के समग्र प्रबंधन (Integrated Water Management) का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां बेकार जाने वाले पानी को इकट्ठा करके उसका दोहरा उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जल संरक्षण मॉडल न केवल पेयजल संकट को कम कर सकते हैं, बल्कि दीर्घकालिक रूप से पर्यावरणीय स्थिरता में भी योगदान देते हैं ।