11 लाख पौधों के महाअभियान का इतिहास मध्यप्रदेश में रचा - Bhaskar Crime

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11 लाख पौधों के महाअभियान का इतिहास मध्यप्रदेश में रचा

*11 लाख पौधों के महाअभियान का इतिहास मध्यप्रदेश में जबलपुर ने रचा*

चीफ एडिटर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर मध्यप्रदेश के इतिहास में आज एक ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दिन दर्ज किया गया, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य को हरित-भविष्य की ओर अग्रसर करने के लिए दो बड़ी और प्रभावी पहलों का एक साथ शुभारंभ किया। यह आयोजन जबलपुर के प्रसिद्ध डुमना नेचर पार्क में हुआ, जहाँ पर्यावरण, जल संरक्षण और सतत विकास के इस महासंगम ने पूरे प्रदेश को एक नई दिशा दी।

 11 लाख पौधों का महाअभियान  मियावाकी पद्धति से रचा गया नया अध्याय

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 11 लाख पौधों के महाअभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसे मियावाकी पद्धति (Miyawaki Technique) से लागू किया जा रहा है – जो कि जापानी वैज्ञानिक आकीरा मियावाकी द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक, वैज्ञानिक और अत्यंत प्रभावी वनीकरण तकनीक है।

 क्या है मियावाकी पद्धति

· इस पद्धति में देशी प्रजातियों के पौधों को एक-दूसरे के बहुत करीब (घना) लगाया जाता है।

· इससे पौधे तेज़ी से ऊपर की ओर बढ़ते हैं और कम समय (20-30 वर्षों में) में एक घना, आत्मनिर्भर और जैव-विविधता से भरपूर प्राकृतिक वन तैयार हो जाता है।

· यह तकनीक 30 गुना अधिक घनी, 10 गुना तेज़ी से बढ़ने वाली और पारंपरिक वनीकरण की तुलना में 100 गुना अधिक जैव-विविधता को सपोर्ट करती है।

 इस अभियान का उद्देश्य:

· पर्यावरण संरक्षण – कार्बन उत्सर्जन कम करना, ऑक्सीजन बढ़ाना।

· जैव विविधता संवर्धन – स्थानीय वन्यजीवों, पक्षियों और कीटों के लिए प्राकृतिक आवास तैयार करना।

· हरित भविष्य – आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पानी और ज़मीन देना।

· सामाजिक जुड़ाव – ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के माध्यम से हर नागरिक को इस अभियान से जोड़ना।

 ‘कैच द रेन’ अभियान – बूंद-बूंद से भरा जल-भविष्य

इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘कैच द रेन’ (वर्षा जल संचयन) अभियान के तहत एक अत्याधुनिक वर्षा जल संचयन प्रणाली का भी उद्घाटन किया, जो डुमना नेचर पार्क में स्थापित की गई है।

 तकनीकी विशेषताएँ:

· रूफ एरिया: 10,000 वर्गफुट की छत से वर्षा जल को सीधा संग्रहित किया जाएगा।

· संग्रहण क्षमता: यह प्रणाली हर वर्ष लाखों लीटर पानी को बिना बर्बाद हुए ज़मीन के अंदर उतारेगी।

· रिचार्ज बोर: 30 फीट गहरे विशेष रिचार्ज बोर के माध्यम से यह पानी सीधा भू-जल स्तर (groundwater table) को रिचार्ज करेगा।

· प्रभाव: यह न केवल जल-स्तर बढ़ाएगा, बल्कि आस-पास के कुओं, नलकूपों और बोरवेलों की पानी की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगा।

 इस पहल की सबसे बड़ी खासियत:

· यह “हर बूँद, कीमती” की सोच पर आधारित है।

· मध्यप्रदेश जैसे राज्य में, जहाँ गर्मी और सूखे की स्थिति बनती रहती है, यह प्रणाली जल संकट से निपटने का एक दीर्घकालिक और सस्ता समाधान है।

· जल संरक्षण के साथ-साथ यह ऊर्जा बचत, फसल सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन में भी सहायक है।

 मुख्यमंत्री का संदेश – “यह सिर्फ पहल नहीं, संकल्प है”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा:

“यह अभियान केवल पौधे लगाने या पानी इकट्ठा करने का नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, समृद्ध और हरित-मध्यप्रदेश सौंपने का संकल्प है। जब हम एक पेड़ माँ के नाम लगाते हैं, तो वह केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी है। और जब हम हर बूंद को जमीन में उतारते हैं, तो हम अपने भविष्य की नींव मजबूत करते हैं।”

पहल संभावित परिणाम

11 लाख पौधे (मियावाकी) 50,000 टन कार्बन अवशोषण/वर्ष, 30% ऑक्सीजन वृद्धि, हजारों प्रजातियों को आवास

10,000 sq. ft. रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग ~6-8 लाख लीटर पानी/वर्ष भू-जल में रिचार्ज

राज्यव्यापी विस्तार आने वाले 5 वर्षों में जलस्तर में 10-15% की संभावित वृद्धि

 एक नई शुरुआत, एक नई विरासत

मध्यप्रदेश ने आज यह साबित कर दिया कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। डुमना नेचर पार्क का यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि पर्यावरण-चेतना की जागृति, वैज्ञानिक सोच और सामूहिक भागीदारी का प्रतीक बन गया

अब ज़रूरत है कि यह अभियान हर गाँव, हर शहर, हर घर तक पहुँचे – ताकि ‘हरियाली’ और ‘जल-संपदा’ मध्यप्रदेश की पहचान बनें, और यह राज्य पूरे देश के लिए पर्यावरणीय उत्कृष्टता का मॉडल बने।

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