*प्रथम किशत में शिक्षा अधिकारी का बाबू 5 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ लोकायुक्त ने दबोचा*
भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: शिक्षा विभाग के बाबू को 5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ किया गिरफ्तार
· आरोपी: नोखेलाल बेलिया (बाबू/सहायक), विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, नारायणगंज, मंडला
· पीड़ित: दशरथ लाल बरमैया (चपरासी/भृत्य), सिवनी माल कन्या आश्रम, विकासखंड नारायणगंज
· रिश्वत की मांग: ₹10,000 (बाद में ₹8,000 पर सहमति)
· पकड़ी गई राशि: ₹5,000 (पहली किस्त के रूप में)
· तारीख: 13 अगस्त 2026
· स्थान: विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, नारायणगंज, जिला मंडला
· कानूनी धाराएँ: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)B, 13(2)
· कार्रवाई: ट्रेप (रंगे हाथ पकड़ना) ऑपरेशन, आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज
विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर/ लोकायुक्त पुलिस ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के एक कर्मचारी को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोचा है। यह घटना जिला मंडला के विकासखंड नारायणगंज स्थित कार्यालय में सामने आई, जहां एक सरकारी बाबू ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक गरीब चपरासी से जीपीएफ (सामान्य संचय निधि) राशि निकालने के बदले रिश्वत मांगी।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित दशरथ लाल बरमैया, जो सिवनी माल कन्या आश्रम, विकासखंड नारायणगंज में भृत्य (चपरासी) के पद पर तैनात हैं, उन्होंने अपनी जीपीएफ राशि (लगभग ₹1 लाख) के भुगतान के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, नारायणगंज में आवेदन दिया था।
आवेदन देने के बाद जब उनकी राशि निकलने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो कार्यालय के बाबू/सहायक नोखेलाल बेलिया ने मौका देखते हुए आवेदक से कहा कि काम आसानी से हो जाएगा, बशर्ते उन्हें इसके लिए "पारितोषक" देना होगा।
शुरूआत में नोखेलाल ने पूरे ₹10,000 की रिश्वत मांगी। बाद में बातचीत के दौरान वह ₹8,000 लेने पर राजी हो गया।
शिकायत से लेकर ट्रेप ऑपरेशन तक – कैसे बिछा जाल?
1. शिकायत दर्ज – पीड़ित दशरथ लाल ने इस मामले की सूचना पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त, जबलपुर को दी। उन्होंने आरोपी बाबू द्वारा रिश्वत मांगने की पूरी बात विस्तार से बताई।
2. सत्यापन प्रक्रिया – शिकायत के सत्यापन के दौरान जब पीड़ित ने आरोपी से दोबारा बातचीत की, तब नोखेलाल ने ₹10,000 की जगह ₹8,000 में समझौता कर लिया और राशि की पहली किस्त ₹5,000 देने का निर्धारण किया।
3. ट्रेप की तैयारी – लोकायुक्त पुलिस ने तुरंत ट्रेप (रंगे हाथ पकड़ने) योजना बनाई। इसके लिए विशेष टीम तैयार की गई, जिसमें महिला पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया।
4. रंगे हाथ दबोचा – आज (13 अगस्त 2026) को जब दशरथ लाल अपने कार्यालय पहुँचे और नोखेलाल बेलिया को पहली किश्त के ₹5,000 सौंपे, तभी लोकायुक्त की टीम ने तालाबंदी करते हुए आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
लोकायुक्त दल में कौन-कौन थे शामिल?
ट्रेप ऑपरेशन के समय उपस्थित अधिकारियों में शामिल रहे:
क्रमांक अधिकारी का नाम पद
1. रेखा प्रजापति उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी), लोकायुक्त
2. उमा कुशवाह निरीक्षक, लोकायुक्त
3. अन्य सहायक कर्मचारी लोकायुक्त जबलपुर दल
यह टीम पूरी तरह से महिला अधिकारियों के नेतृत्व में थी, जिसने मामले को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा किया।
क्या है कानूनी कार्रवाई
लोकायुक्त ने आरोपी नोखेलाल बेलिया के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है:
· धारा 7 – लोक सेवक द्वारा रिश्वत माँगना/स्वीकार करना
· धारा 13(1)B – आपराधिक कुप्रथाएँ (अवैध लाभ प्राप्ति)
· धारा 13(2) – भ्रष्टाचार के अपराधों के लिए दंड
ये सभी धाराएँ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधन 2018) के अंतर्गत आती हैं, जिसमें अपराधियों को न्यूनतम 3 वर्ष से लेकर 7 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
प्रशासन का सख्त रुख
लोकायुक्त जबलपुर ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं है। किसी भी आम जन को जबरन रिश्वत नहीं देनी चाहिए और तुरंत लोकायुक्त या एंटी करप्शन हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए।
जनता के लिए सन्देश
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि यदि आप रिश्वत माँगने वाले अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो कानून आपके साथ है। लोकायुक्त की सक्रियता के कारण एक गरीब कर्मचारी को अपनी मेहनत की रकम निकालने के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जनसहयोग सबसे बड़ा हथियार है।
आगे की कार्यवाही;आरोपी नोखेलाल बेलिया को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा। लोकायुक्त टीम मामले की गहन जाँच कर रही है कि कहीं उसने पहले भी ऐसा कोई अपराध तो नहीं किया है।