खाद्य विभाग की पोल: शहर की मिठाई दुकानों पर नरमी, ग्रामीण इलाकों में सख्ती के आरोप
शहर की कई बड़ी मिठाई और खोवा की दुकानें स्थानीय राजनेताओं के संरक्षण में चल रही हैं
लेकिन सवाल यह है कि आखिर बाकी दर्जनों दुकानों पर क्यों कोई कार्रवाई नहीं हो रही
विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर। कलेक्टर राधवेंद्र सिंह के निर्देश पर त्योहार सीजन के दौरान मिलावटी खाने पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे अभियान को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में खाद्य अधिकारी टीम के द्वारा शहर के प्रभावशाली दुकानदारों को नजरअंदाज करते हुए केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित बताई जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जबलपुर शहर की कई बड़ी मिठाई और खोवा की दुकानें स्थानीय राजनेताओं के संरक्षण में चल रही हैं, जिसके चलते खाद्य अधिकारी वहां जांच करने से बच रहे हैं ।
शहर की प्रतिष्ठित दुकानें क्यों हैं सुरक्षित
खाद्य सुरक्षा विभाग ने हाल ही में श्रीराम स्वीट्स और श्री स्वीट्स एंड बेकरी जैसी कुछ दुकानों पर कार्रवाई की थी, जहां मिठाइयों में कॉकरोच और कीड़े मिलने के साथ चांदी वर्क की जगह एल्यूमिनियम फॉइल का इस्तेमाल पाया गया था । लेकिन सवाल यह है कि आखिर बाकी दर्जनों दुकानों पर क्यों कोई कार्रवाई नहीं हो रही?
सूत्र बताते हैं कि शहर के कुछ प्रमुख मिठाई विक्रेता सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल के नेताओं और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क में हैं। इस राजनीतिक संरक्षण के कारण खाद्य अधिकारी न केवल वहां निरीक्षण करने से कतराते हैं, बल्कि सैंपल लेने से भी परहेज करते हैं । एक खाद्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि त्योहारी सीजन में शहर की कुछ दुकानों पर जाने के लिए फोन पर पहले से 'निर्देश' आ जाते हैं, जिससे अभियान की गंभीरता खत्म हो जाती है।
ग्रामीण इलाकों में सख्ती, शहर में ढिलाई
जहां एक तरफ शहर के मुख्य बाजारों में अधिकारियों का कदम कम दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ जबलपुर के पाटन और शहपुरा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य विभाग की टीम सक्रिय नजर आ रही है । हाल ही में पाटन क्षेत्र की 5 मिठाई दुकानों - बड्डू स्वीट्स, संदीप खोवा, राजू स्वीट्स, जुगल स्वीट्स और मदन स्वीट्स - पर कार्रवाई कर 7 सैंपल लिए गए। इस दौरान एक दुकान से 40 किलोग्राम प्रतिबंधित एनालॉग मिल्क केक भी जब्त किया गया ।
इसके अलावा खाद्य अधिकारियों ने जबलपुर के धनवंतरि नगर स्थित ब्लिंकिट स्टोर से 12 हजार रुपये का गोवर्धन घी, डीमार्ट से 200 किलोग्राम घी और शहर के विभिन्न पिज्जा सेंटरों से पनीर के नमूने जांच के लिए भेजे हैं । लेकिन यह सब कार्रवाई शहर के बड़े मिठाई कारोबारियों के खिलाफ नहीं, बल्कि छोटे विक्रेताओं और स्टोरों के खिलाफ है।
अधिकारियों की कमी या जानबूझकर की गई अनदेखी
खाद्य सुरक्षा विभाग इस ढिलाई के लिए अधिकारियों की कमी को जिम्मेदार ठहराता है। दरअसल, पूरे प्रदेश से हर महीने करीब 3,000 खाद्य नमूने जांच के लिए अकेले भोपाल स्थित प्रयोगशाला में आते हैं, जिससे रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं । जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में बन रही नई प्रयोगशालाएं अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं, जिससे मिलावटखोरों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है ।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों की कमी बहाना है। शहर के अंदर बड़ी दुकानों पर जांच न होना इस बात का सबूत है कि राजनीतिक दबाव में काम हो रहा है । कलेक्टर राधवेंद्र सिंह के निर्देश पर खाद्य पदार्थों की बिक्री और मिश्रण पर रोक लगाने के लिए चलाया जा रहा यह अभियान तभी सफल होगा, जब शहर की बड़ी दुकानों को भी बख्शा नहीं जाएगा।
त्योहार के मौके पर मिलावटी खाने से सेहत को होने वाले नुकसान को देखते हुए अभियान की दिशा बदलना नितांत आवश्यक है, अन्यथा आम जनता का भरोसा प्रशासन पर से उठ जाएगा।
