"जुनूनी जांबाज अफसर: जबलपुर के 4 पुलिस अधिकारी जिनके नाम से काँपते हैं गुंडे, नाम की नहीं, काम की पूजा"
"न इनाम की तड़प, न नाम की ललक"
*बिहार-मुंबई-दिल्ली-यूपी एवं अन्य राज्यों से पकड़ लाए बदमाश, सिर्फ एक संतोष सलाखों के पीछे हो गुनहगार*
(मनोज विश्वकर्मा चीफ एडिटर)
क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर (MP) : पुलिस विभाग की छवि में चमक बची है तो उन चंद ईमानदार, निडर और समर्पित अफसरों की वजह से, जो न तो पद की चमक देखते हैं और न ही तारीफों के भूखे। जबलपुर पुलिस में चार ऐसे सब-इंस्पेक्टर हैं—चंद्रकांत झा, दिनेश गौतम, प्रभाकर सिंह और सतीश झारिया—जिनका नाम आम जनता को कम पता है, लेकिन पुलिस मुख्यालय से लेकर सीपी कार्यालय तक, इन्हें सबसे 'विश्वसनीय' हथियार माना जाता है।
ये चारों जांबाज अफसर उन दुर्लभ अपराधों की गुत्थियाँ सुलझाते हैं, जिनमें सुराग भी मुश्किल मिलते हैं। लूट, डकैती, हत्या, अपहरण हर संगीन मामले में ये अंधेरी सुरंग में बेधड़क घुसते हैं और असली गुनहगार तक पहुँचते हैं।
सबसे खास बात इन्हें न इनाम की तड़प है, न नाम कमाने की ललक। इनका जुनून सिर्फ एक है "जो केस सौंपा जाए, उसे हर कीमत पर सुलझाकर दोषी को सलाखों के पीछे पहुँचाना।" यही संतोष इनका सबसे बड़ा इनाम है।
कमाल ये कि ये चारों सिर्फ जबलपुर या MP तक सीमित नहीं। इन्होंने बिहार, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, मुंबई और दिल्ली जैसे अन्य राज्यों से भी गुंडों को पकड़कर लाया है। एक से बढ़कर एक चुनौतीपूर्ण मामलों में इन्होंने पुलिस विभाग की 'नाक बचाई' और सिर ऊँचा किया।
आम आदमी भले इनके चेहरे न पहचाने, लेकिन इनका होना हर नागरिक को सुरक्षा का भरोसा देता है। ये वही 'साये' हैं जो अपराधियों के लिए आँधी बनकर आते हैं, और समाज के लिए ढाल बनकर खड़े रहते हैं।
