पुलिस ने बैंक अधिकारियों के साथ की बैठक, साइबर ठगी रोकने के लिए बनाई रणनीति
विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर। बैंकिंग और एटीएम से जुड़े बढ़ते फ्रॉड तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगाने और नागरिकों को साइबर अपराध से बचाने के लिए पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने बैंक अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक आज पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित की गई।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर आयुष जाखड़ की विशेष उपस्थिति रही। इसके अलावा, नगर पुलिस अधीक्षक (कैंट/अपराध) उदय भान बागरी तथा विभिन्न बैंकों के करीब 40 अधिकारी मौजूद रहे।
बैंक अधिकारियों को दी ये जिम्मेदारी
पुलिस अधीक्षक ने बैठक की शुरुआत सभी अधिकारियों का परिचय प्राप्त करके की। उन्होंने कहा कि जबलपुर पुलिस लगातार स्कूल-कॉलेज, कॉलोनियों, बाजारों और बस स्टैंड जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर पोस्टर और बैनर के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक कर रही है, लेकिन इस जागरूकता अभियान की जिम्मेदारी अकेले पुलिस की नहीं है।
"साइबर अपराध से सुरक्षा के लिए बैंक अधिकारियों की भी बराबर की जिम्मेदारी है। यदि आप स्वयं जागरूक रहेंगे और अपने खाताधारकों को भी जागरूक करेंगे, तो ही हम साइबर ठगी को प्रभावी रूप से रोक सकते हैं," एसपी सम्पत उपाध्याय ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा।
बैठक में उठाए गए प्रमुख बिंदु
बैठक में बैंकों से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई। इनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
1. जानकारी उपलब्ध कराने में देरी: बैंकों द्वारा केवाईसी, एओएफ और बैंक स्टेटमेंट समय पर न देना, जिससे जांच में बाधा आती है।
2. पोर्टल अपडेट में लापरवाही: पोर्टल पर समय से शिकायत अपडेट न होने के कारण पीड़ितों के पैसे पर होल्ड/लीन नहीं लग पाता, जिससे ठगी की राशि निकाल ली जाती है।
3. कोर्ट ऑर्डर का पालन न करना: बैंकों द्वारा पैसे रिफंड करने के कोर्ट ऑर्डर का समय पर पालन न करना।
4. खाता होल्ड की जानकारी में कमी: खाता होल्ड होने पर बैंक यह जानकारी नहीं देते कि आवेदक किस जिले या राज्य का है, जिससे पीड़ितों को परेशानी होती है।
5. एमआरएम पोर्टल पर सुस्ती: एम.आर.एम. पोर्टल द्वारा रिफंड के अनुरोध पर बैंक समय पर एक्शन नहीं लेते।
6. जीआरएम पोर्टल पर अपडेट न होना: जी.आर.एम. (ग्रीवांस रिड्रेसल मैनेजमेंट) में एल.ई.ए. द्वारा लिए गए एक्शन का अपडेट बैंक समय पर नहीं कर रहे हैं।
रिफंड के लिए नई व्यवस्था और पोर्टल
बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा साइबर क्राइम पीड़ितों के लिए लॉन्च किए गए नए सब-पोर्टल पर भी चर्चा की गई। इस पोर्टल के माध्यम से पीड़ित कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके सीधे रिफंड की रिक्वेस्ट कर सकेंगे। इसके अलावा, जीआरएम पोर्टल की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया, जो बैंक, साइबर क्राइम या सरकारी विभागों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए बनाया गया है। बैंक खाता फ्रीज होने या साइबर ठगी के मामलों में यह पोर्टल काफी कारगर साबित हो रहा है।
घर बैठे पैसे वापस पाने के तरीके पर चर्चा
पुलिस अधीक्षक ने ऑनलाइन साइबर ठगी, ओटीपी फ्रॉड या 'डिजिटल अरेस्ट' के शिकार लोगों को घर बैठे अपने पैसे वापस पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से बताया। बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे पीड़ितों को शिकायत दर्ज करने और रिफंड के नियमों को समझने में मदद करें, ताकि ठगी का शिकार हुआ व्यक्ति समय पर सही प्रक्रिया अपनाकर अपनी राशि वापस पा सके।