हिन्दी महोत्सव में 350 विद्यार्थियों ने चित्रकला से दिया संस्कृति और भाषा को नया आयाम - Bhaskar Crime

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हिन्दी महोत्सव में 350 विद्यार्थियों ने चित्रकला से दिया संस्कृति और भाषा को नया आयाम

*रंगों में विचारों की उड़ान: हिन्दी महोत्सव में 350 विद्यार्थियों ने चित्रकला से दिया संस्कृति और भाषा को नया आयाम*

मध्यप्रदेश विद्युत परिवार हिन्दी समिति और केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद के संयुक्त तत्वावधान में चार दिवसीय हिन्दी महोत्सव की भव्य शुरुआत

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर, 13 सितंबर। मध्यप्रदेश विद्युत परिवार हिन्दी समिति और केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय हिन्दी महोत्सव का शुभारंभ आज रामपुर स्थित कल्याण भवन में हुआ। महोत्सव के प्रथम दिवस पर स्कूली विद्यार्थियों की चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें लगभग साढ़े तीन सौ विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर रंगों और विचारों के माध्यम से अपनी कल्पनाओं को नई उड़ान दी।

तीन समूहों में विभाजित प्रतियोगिता

चित्रकला प्रतियोगिता को तीन समूहों में विभाजित किया गया था—कक्षा पहली से तीसरी, कक्षा चौथी से सातवीं, और कक्षा आठवीं से दसवीं तक के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग श्रेणियाँ निर्धारित की गईं। इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों में कला के प्रति रुचि जागृत करना और हिन्दी भाषा तथा संस्कृति के प्रति उनका जुड़ाव गहरा करना था।

"चित्र केवल रंगों का संयोजन नहीं, विचार है महत्वपूर्ण"

चित्रकला प्रतियोगिता के निर्णायक और प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट राजेश दुबे ने प्रतिभागी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, "चित्रकला सिर्फ रेखांकन और रंगों का संयोजन नहीं है, बल्कि कोई भी चित्र अपने भीतर छिपे विचार की अभिव्यक्ति के कारण अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। एक सशक्त विचार ही चित्र को जीवंत बनाता है।"

"बच्चे हैं हमारी संस्कृति और भाषा के भविष्य"

हिन्दी समिति के अध्यक्ष फिरोज कुमार मेश्राम ने कहा, "महोत्सव की शुरुआत चित्रकला प्रतियोगिता से करने का निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि हमारा मानना है कि बच्चे ही हमारी संस्कृति और भाषा के भविष्य हैं। अक्सर यह माना जाता है कि भाषा केवल शब्दों का माध्यम है, लेकिन सच्चाई यह है कि कला भी अभिव्यक्ति की एक अत्यंत सशक्त भाषा है। आज इस प्रतियोगिता के माध्यम से हमारे बच्चे कागज़ पर रंगों को बिखेरकर हिन्दी भाषा, हमारी संस्कृति और अपनी सोच को एक नया रूप दे रहे हैं। जब एक बच्चा चित्र बनाता है, तो वह सीधे अपने हृदय की बात कहता है।"

कार्टूनिस्ट राजेश दुबे का सम्मान

इस अवसर पर कार्टून और चित्रकला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कार्टूनिस्ट राजेश दुबे को मध्यप्रदेश विद्युत परिवार हिन्दी समिति की ओर से सम्मानित किया गया। हिन्दी महोत्सव के अध्यक्ष फिरोज कुमार मेश्राम, अतिरिक्त मुख्य अभियंता अनुराग नायक, संयोजक दीपक निगम, उपाध्यक्ष नितिन खत्री और केन्द्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद के सचिव महेश चन्द बलोदी ने शॉल, श्रीफल और सम्मान पत्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया।

पर्यावरण, प्रकृति और हिन्दी प्रचार-प्रसार पर आधारित चित्र

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले स्कूली विद्यार्थियों ने अपने चित्रों में रेखांकन, रंगों और विचारों के माध्यम से कल्पना को साकार किया। बच्चों की चित्रकला में मुख्य रूप से पर्यावरण, प्रकृति और हिन्दी के प्रचार-प्रसार जैसे विषय देखने को मिले। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी साढ़े तीन सौ विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।

सामूहिक प्रयास से सफल आयोजन

चित्रकला प्रतियोगिता के संयोजन और समन्वय में पराग मिश्रा, अंकुर चौरसिया, शशिकांत ओझा, इकबाल खान, अमर कुशवाहा, संजय आनंद, सुहास कोरडे, संजय पोल, क्रिस्टोफर नरोन्हा, गौरव शर्मा, रोहित कुशवाहा, राकेश यादव, राकेश स्वामी और घनश्याम राने ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन सुरेश त्रिवेदी ने किया।

15 सितंबर को भव्य उद्घाटन समारोह

हिन्दी महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन 15 सितंबर को अपराह्न 3 बजे शक्तिभवन स्थित केन्द्रीय पुस्तकालय में होगा। इस अवसर पर डॉ. दीप्ति पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। कार्यक्रम में कार्यालयीन टीप प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, साथ ही आशीष पाठक द्वारा लिखित और निर्देशित तथा विनय शर्मा के एकल अभिनय से नाटक 'पापकार्न' का मंचन समागम रंगमंडल द्वारा किया जाएगा।

विशेष आकर्षण: कार्टून और छायाचित्र प्रदर्शनी

उद्घाटन समारोह के अवसर पर कार्टूनिस्ट राजेश दुबे के कार्टून और छायाकार अजय धाबर्डे की छायाचित्र प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केन्द्र होगी। इसके अतिरिक्त अजय यादव द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी का संयोजन भी किया जाएगा, जो महोत्सव में आने वाले साहित्य प्रेमियों के लिए एक अतिरिक्त आकर्षण होगा।

यह चार दिवसीय हिन्दी महोत्सव न केवल भाषा के प्रचार-प्रसार का माध्यम है, बल्कि कला, संस्कृति और साहित्य के समन्वय का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिसमें बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक सभी की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।