त्योहारों पर अपराध का बोलबाला, हत्या, चोरी, चाकूबाजी और लूट की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता - Bhaskar Crime

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त्योहारों पर अपराध का बोलबाला, हत्या, चोरी, चाकूबाजी और लूट की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

त्योहारों पर अपराध का बोलबाला, पुलिस की विफलता से आम नागरिक में दहशत 

संस्कारधानी में आधी रात           मूर्तिकार की हत्या,चोरी,चाकूबाजी और लूट की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

          (मनोज विश्वकर्मा=सम्पादक)

   क्राइम भास्कर न्यूज टीम जबलपुर संस्कारधानी में त्योहारों का मौसम आते ही जबलपुर में अपराधियों का मनोबल चरम पर पहुंच गया है। जन्माष्टमी और गणेशोत्सव के पावन अवसर पर शहर में गोलीबारी, हत्या, चाकूबाजी और लूट की घटनाओं ने आम नागरिकों के मन में दहशत पैदा कर दी है। पुलिस विभाग अपनी विफलता को छिपाने के लिए एक ही बहाना बनाता है “पुलिस की कमी”  लेकिन हकीकत यह है कि कानून-व्यवस्था की खुली पोल हो रही है और अपराधियों को कोई डर नहीं है।

 त्योहारी सीजन में खून से सना शहर

शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात जब पूरा शहर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में डूबा हुआ था, उसी वक्त जबलपुर के भानतलैया सिंधी कैंप में 48 वर्षीय मूर्तिकार मनोज सोनकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वे गणेश प्रतिमा बनाने के बाद पंडाल से बाहर निकले ही थे कि बाइक सवार 2-3 युवकों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। गोली पेट में लगने से वे गंभीर रूप से घायल हुए और विक्टोरिया अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

पुलिस ने हत्या के पीछे “पुरानी रंजिश” की आशंका जताई है। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों से पुराना विवाद बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि त्योहार के दौरान भी अपराधी इतने बेखौफ कैसे हैं

 मंदिरों में भी नहीं छोड़ा धर्मस्थल

अपराधियों ने धार्मिक स्थलों को भी नहीं बख्शा। आधारताल थाना क्षेत्र के प्राचीन लक्ष्मी-नारायण पचमठा मंदिर में नकाबपोश बदमाशों ने ताला तोड़कर दानपेटी से नकदी और जेवर चुरा लिए। बदमाशों ने मंदिर में स्थापित प्राचीन लक्ष्मी प्रतिमा को भी ले जाने की कोशिश की, लेकिन प्रतिमा खंडित होने पर उसे वहीं छोड़कर भाग गए। सबसे चौंकाने वाली बात बदमाशों ने पहचान छिपाने के लिए मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया। वारदात के बाद इलाके में भारी आक्रोश है।

 चाकूबाजी और लूट आम दिनचर्या बनी अपराध की घटनाएं

जबलपुर में चाकूबाजी की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में गुटखा नहीं देने जैसी मामूली बात पर दो बदमाशों ने एक दुकानदार पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। मदनमहल थाना क्षेत्र में बदमाशों ने शराब की दुकान में घुसकर लूटपाट और चाकूबाजी की। गढ़ा थाना क्षेत्र में एक ट्रक ड्राइवर के साथ लूट और चाकूबाजी की वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

 पुलिस की असहायता 539 पद खाली, सुरक्षा भगवान भरोसे

पुलिस विभाग अपनी विफलता के लिए लगातार “जनशक्ति की कमी” का रोना रोता है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं  जबलपुर जिले में कुल 3,803 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 3,264 पुलिसकर्मी ही कार्यरत हैं। यानी 539 पद खाली हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि सब इंस्पेक्टर, एएसआई और आरक्षक  जिन पदों पर सबसे अधिक काम का बोझ है वहीं सबसे ज्यादा रिक्तियां हैं।

सीसीटीवी अपराधियों को पकड़ने का एकमात्र सहारा

जब पुलिस का बल अपराधियों को पकड़ने में असमर्थ है, तो एकमात्र सहारा बन गया है “तीसरी आंख” — सीसीटीवी कैमरे। हर घटना के बाद पुलिस CCTV फुटेज खंगालने में जुट जाती है। लेकिन अपराधी भी अब सीसीटीवी से बचने के तरीके सीख गए हैं  मंदिर में चोरी की वारदात में बदमाशों ने सबसे पहले कैमरे तोड़े।

 आम नागरिक में डर का माहौल

संस्कारधानी कहलाने वाला जबलपुर आज अपराधों की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जिसने आम आदमी के मन में डर पैदा कर दिया है। खासकर धार्मिक त्योहारों के दौरान यह डर और बढ़ जाता है। हर दिन किसी न किसी थाने में एक नई एफआईआर दर्ज की जा रही है। अपराध का कारण चाहे “पुरानी रंजिश” हो या “नशा”  पुलिस के पास न कोई ठोस योजना है, न कोई प्रभावी कार्रवाई।

हालांकि पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने हाल ही में अपराध नियंत्रण में कमी पर 26 थाना प्रभारियों को एक साथ सजा दी, और पुलिस की प्रभावी कार्रवाई से चाकू से होने वाले अपराधों में 17 प्रतिशत की कमी बताई गई है। लेकिन आम नागरिक को इन आंकड़ों पर भरोसा नहीं है  क्योंकि सड़कों पर हालात अब भी वही हैं। अपराधियों का बेखौफ होना, पुलिस का असहाय होना और आम जनता का डर यही जबलपुर की सच्चाई है।

जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जबलपुर दौरा आया, तो सुरक्षा व्यवस्था के लिए दूसरे जिलों और विशेष सशस्त्र बल से लगभग 1,800 अतिरिक्त जवान बुलाने पड़े। कुछ ही दिनों बाद मुहर्रम के अवसर पर 200 अतिरिक्त जवानों की मांग करनी पड़ी। यह सवाल उठता है कि क्या जबलपुर जैसा संभागीय मुख्यालय अपनी सुरक्षा खुद संभालने की स्थिति में नहीं है?