सड़कों को रोशन वाली सफेद एलईडी लाइटें कुछ ही महीनों में 'पीली' पड़ गईं - Bhaskar Crime

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सड़कों को रोशन वाली सफेद एलईडी लाइटें कुछ ही महीनों में 'पीली' पड़ गईं

ग्वारीघाट चौराह की सड़कों  'सफेद' से 'पीली' हुईं लाइटें, 

   (एलएडी पीली लाइट गाड़ी की सफेद लाइट )

लाखों रुपये के अनियमितताओं का मामला का हुआ खुलासा 

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है


जबलपुर (विशेष संवाददाता) ग्वारीघाट चौराह से लेकर रामपुर तक एवं कई क्षेत्रो की सड़कों को रोशन करने के लिए खरीदी गईं सफेद एलईडी लाइटें कुछ ही महीनों में 'पीली' पड़ गईं और फिर बंद हो गईं। इस घटना ने नगर निगम के एक करोड़ों रुपये के खरीद-घोटाले की परतें खोल दी हैं। सड़कों पर लगी इन खराब लाइटों ने एक बड़े भ्रष्टाचार के मामले का पर्दाफाश किया है, जिसकी अब आधिकारिक जांच शुरू हो गई है और मामला दर्ज कर लिया गया है।

मामले की जड़: सवालों के घेरे में रही खरीद प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, जबलपुर नगर निगम द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में शहर की प्रमुख सड़कों एवं चौराहों पर उच्च गुणवत्ता वाली सफेद एलईडी स्ट्रीट लाइट्स लगाने का बड़ा टेंडर जारी किया गया था। इस खरीद पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। हालांकि, निर्माण कार्य पूरा होने के मात्र कुछ महीनों के भीतर ही ये लाइटें खराब होने लगीं।

· अनियमितता के संकेत: लाइटों का रंग सफेद से बदलकर पीला हो गया, जो उनकी तकनीकी खराबी या घटिया गुणवत्ता का संकेत है।

· पूर्ण विफलता: इसके तुरंत बाद, लाइटों का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका है, जिससे कई इलाके अंधेरे में डूब गए हैं और नागरिक सुरक्षा चिंतित हैं।

· जन शिकायतें: लगातार मिल रही जनशिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले की गंभीरता से लेनी चाहिए 

 भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के मद्देनजर एक विशेष जांच समिति गठित किया जाना चाहिए। इस समिति का कार्य खरीद प्रक्रिया, टेंडर नियमों, वित्तीय लेनदेन और उपकरणों की गुणवत्ता की पूरी तहकीकात ज़रुरी है। सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार फर्म और नगर निगम के कुछ अधिकारियों के बीच गठजोड़ की आशंका जताई जा रही है।


 केवल तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि करदाताओं के पैसे की लूट का मामला प्रतीत होता है। जांच में सभी दोषी पाए जाने पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित किया जाना चाहिए जांच समितिटेंडर दस्तावेज, बिल भुगतान और खराब पड़ी लाइटों के तकनीकी मूल्यांकन की समीक्षा कर रही है। मामले में दोषियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

नागरिक समाज के प्रतिनिधि इस मामले पर तेजी से और पारदर्शी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामले न केवल सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हैं, बल्कि शहर के विकास और नागरिकों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।