बमबाजी की दो घटनाओं का सफल खुलासा, पुलिस ने निकाला जुलूस पहुंचा जेल
युवाओं के हाथों बस्तियों में बम गूंजे, पुलिस ने बड़ा एक्शन सभी को भेजा जेल 
चीफ एडिटर जबलपुर। एक ही दिन में दो बार, दो अलग-अलग मोहल्लों में बम के धमाके। निशाना आम नागरिक, दुकानें और रिहायशी इलाके। लेकिन जो चौंकाने वाला है, वह यह कि इन धमाकों के पीछे ज्यादातर वो चेहरे थे, जिनकी उम्र कानून की नजर में ‘बालक’ है। रांझी थाना पुलिस ने 11 जून 2026 को हुई बमबाजी की दोनों घटनाओं का खुलासा तो कर लिया, लेकिन असली कहानी यहाँ से शुरू होती है पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें सीधे जेल नहीं भेजा, बल्कि एक प्रतीकात्मक ‘जुलूस’ निकाला, जो थाने से शुरू होकर जेल तक पहुंचा। यह जुलूस अपराध के प्रति एक सख्त संदेश था।
खुलासा: घटना-1 (दिन का धमाका)समय: 11 जून, दोपहर 2:00 बजे
स्थान: मडई शराब दुकान के बाहर
मोडस ऑपरेंडी: एक्सेस वाहन से आए दो युवकों ने बम फेंका, दुकानदार को गालियाँ दीं, और माहौल में दहशत फैला दी।
· केस दर्ज धारा 296(बी) BNS व 3/5 विस्फोटक अधिनियम (अपराध क्रमांक 449/2026)
· सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से बजरंग नगर के दो विधि-विवादित बालकों की पहचान
· उनके कब्जे से एक्सेस वाहन और घटना के कपड़े बरामद
· दोनों को किशोर न्यायालय में पेश किया जाएगा
खुलासा: घटना-2 (रात का आतंक)
समय: 11 जून, रात:स्थान: अंजनी कॉलोनी, रिछाई (फरियादी संतोष कुमार भारती के घर के पास)
मोडस ऑपरेंडी: मोहल्ले में ‘सूअर मार बम’ फेंककर आतंक फैलाना
गिरफ्तार आरोपी (तीन युवक):
1. समर सोनकर (18) – भारतीपुरा
2. सान उर्फ सानू (18) – बापूनगर
3. हर्ष सिंह राजपूत (19) – इंदिरा नगर
इसके अलावा:
· 03 विधि-विवादित बालक भी आरोपी
· 02 अन्य नाबालिगों ने बम उपलब्ध कराए — वे भी गिरफ्तार
· बम बनाने के लिए पटाखे बेचने वाले दुकानदार पर भी कार्रवाई होगी
बरामदगी: एक्सेस वाहन, 4 मोबाइल, घटना के कपड़े
चौंकाने वाला पहलू: अपराध की उम्र घट रही है
दोनों घटनाओं में करीब आधा दर्जन से अधिक नाबालिग शामिल हैं। पुलिस ने सिर्फ गिरफ्तारी नहीं की, बल्कि:
· सभी बालकों और युवकों की काउंसलिंग की
· उन्हें अपराध के दुष्परिणाम समझाए
· अभिभावकों से कहा “बच्चों पर नज़र रखें, वरना अगली बार जेल का रास्ता सीधा होगा”
थाना रांझी पुलिस का बयान:
“क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। असामाजिक तत्वों के खिलाफ यह कार्रवाई जारी रहेगी। जुलूस निकालने का उद्देश्य लोगों में जागरूकता और अपराधियों में डर पैदा करना था।”
कहानी का असली मोड़:
पुलिस ने यहाँ सिर्फ अपराध नहीं सुलझाया, बल्कि एक सामाजिक समस्या की तरफ इशारा किया कम उम्र में हथियार, बम, और गुंडागर्दी। यह ‘जुलूस’ सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि एक चेतावनी है अब नाबालिग का मुखौटा अपराधियों के लिए ढाल नहीं बनेगा।
क्या आपके मोहल्ले का किशोर भी इस रास्ते पर तो नहीं