राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने आदिवासी छात्रावास में 'पर्सनल' स्टोरी' साझा किया - Bhaskar Crime

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राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने आदिवासी छात्रावास में 'पर्सनल' स्टोरी' साझा किया

  "बेटियां हैं तो संवारना हमारी जिम्मेदारी"

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने आदिवासी छात्रावास में साझा की 'पर्सनल' स्टोरी'

औषधि पौधे लगाकर दी प्रकृति व सेहत की सीख

चीफ एडिटर क्राइम भास्कर न्यूज/ जबलपुर शनिवार को शास्त्री ब्रिज स्थित नरसिंह मंदिर परिसर की सन्नाटे भरी गलियाँ अचानक उत्साह और किलकारियों से गूंज उठीं। दरअसल, प्रदेश के प्रथम नागरिक राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने यहां संचालित भगिनी निवेदिता बालिका छात्रावास का दौरा किया, लेकिन यह दौरा औपचारिकता से कहीं आगे का था यह एक 'पिता' का अपनी बेटियों से दिल खोलकर हुआ संवाद था, जिसमें सरकारी गरिमा के बजाय अपनापन और आत्मीयता छाई रही।

'मेरी भी तीन बेटियां हैं, नातिन है इंजीनियर'

राज्यपाल जब छात्रावास के कमरों में दाखिल हुए, तो उन्होंने सबसे पहले बेड से लेकर स्टडी टेबल तक जांचा। पढ़ाई के लिए रोशनी की व्यवस्था देखी और बालिकाओं से उनकी डेली रूटीन पूछी। इस दौरान जब एक डरपोक छात्रा से उन्होंने परिवार के बारे में पूछा, तो राज्यपाल ने उसे ढांढस बंधाते हुए निजी किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा, "मेरी भी तीन बेटियां हैं और हमारी नातिन आज कंप्यूटर इंजीनियर है। जब मेरी बेटियां पढ़ती थीं, तो मैं भी उनके लिए यही चाहता था कि वे आत्मनिर्भर बनें। आप सब भी मेरी बेटियां हैं, इसलिए दुनिया की कोई ताकत आपको पढ़ने से रोक नहीं सकती।"

यह क्षण पूरे छात्रावास के लिए भावुक करने वाला था, क्योंकि एक संवैधानिक पदाधिकारी ने न सिर्फ अपनी निजी जिंदगी का दरवाजा खोला, बल्कि इंजीनियर-डॉक्टर बनने का सपना सुनाने वाले 'राज्यपाल' के बजाय 'मंगुभाई' उनके बीच आ बैठे।

'औषधि का पौधा' : केवल हरियाली नहीं, स्वदेशी स्वास्थ्य का संकल्प

सामान्य अतिथियों की तरह फोटो खिंचवाने और ताली बजाने के बजाय, राज्यपाल ने परिसर में जाकर औषधि पौधरोपण किया। यह इशारा बेहद 'हटके' और प्रतीकात्मक था। उन्होंने नीम, तुलसी और गिलोय सहित देशी औषधीय पौधे रोपे और छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि ये पौधे सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद) की जड़ें हैं। उन्होंने कहा, "अगर आपको डॉक्टर बनना है, तो सबसे पहले अपने आसपास की प्रकृति को पहचानें। ये जड़ी-बूटियां हमें बीमार होने से पहले ही स्वस्थ रखने का गुर सिखाती हैं।" 

इस दौरान उन्होंने छात्राओं से वादा लिया कि वे रोज इन पौधों को पानी देंगी और इनके गुणों के बारे में पढ़ाई करेंगी, जिससे विज्ञान और धरोहर का अद्भुत समन्वय हो सके।

'विद्या भारती' जैसी संस्था में पढ़ना सौभाग्य

राज्यपाल ने छात्रावास की रसोई और पुस्तकालय का भी औचक निरीक्षण किया। उन्होंने रसोइयों से भोजन की गुणवत्ता पूछी और बालिकाओं को संतुलित आहार लेने की सलाह दी। शिक्षकों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि सिर्फ किताबी ज्ञान ही काफी नहीं, बल्कि बच्चियों को आत्मविश्वास के साथ खड़ा होना सिखाएं। 

उन्होंने क्षेत्रीय संगठन मंत्री अखिलेश मिश्रा और प्रादेशिक सचिव डॉ. सुधीर अग्रवाल की मौजूदगी में विद्या भारती की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि "विद्या भारती जैसे संस्थान में पढ़ना और रहना बेटियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ये संस्थाएं राष्ट्र निर्माण की ईंटें तैयार कर रही हैं।" 

उन्होंने अखिल भारतीय बालिका शिक्षा प्रमुख रेखा चूड़ासमा के कार्यों की तारीफ भी की और कहा कि बालिका शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अनुकरणीय है।

अफसरों को नसीहत, दर-बदर न घूमें बेटियां

उन्होंने इस मौके पर मौजूद आयुक्त श्री धनंजय सिंह और आईजी से संवाद करते हुए सख्ती से कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की बेटियों को स्कूल तक पहुंचने के लिए किलोमीटरों न पैदल चलना पड़े। उन्होंने छात्राओं को संबोधित कर कहा, "आप इंजीनियर बनकर बांध बनाओ, डॉक्टर बनकर गांव-गांव में इलाज पहुंचाओ। देश का नाम रोशन करने वाली ये बेटियां ही 'विकसित भारत' की नींव हैं।"

कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य

इस अवसर पर विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री  अखिलेश मिश्रा, प्रादेशिक सचिव डॉ. सुधीर अग्रवाल, संगठन मंत्री अमित दवे, विष्णुकांत ठाकुर, ईश्वर पटेल, हरिराम तिवारी, विवेक चौधरी, कमलेश अग्रहरी, मंजू सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शिक्षिकाएं व छात्रावास की बालिकाएं उपस्थित रहीं।

राज्यपाल के इस 'दिल से दिल' मिलन ने साबित कर दिया कि सरकारी दौरे भी पितृत्व की ममता और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत मंच बन सकते हैं।