नर्मदा के संरक्षण को लेकर जिला स्तरीय ‘नर्मदा संवाद’ कार्यशाला संपन्न
माँ नर्मदा की निर्मलता, स्वच्छता एवं अविरलता बनाए रखने के लिए आग्रह किया
विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर, नर्मदा नदी की निर्मलता, अविरलता और समग्र स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला 'नर्मदा संवाद' का आयोजन आज जिला पंचायत सभागार में किया गया। यह आयोजन मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद्, जिला जबलपुर एवं नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में परिषद् की 'संवाद योजना' के अंतर्गत किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नर्मदा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण हेतु एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना तथा जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए कार्यकर्ताओं को जल, पर्यावरण एवं नदी संवर्धन की दिशा में दिशा-निर्देशित करना था।
शुभारंभ एवं विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ नर्मदा एवं भारत माता के तैल चित्र पर पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच पर उपस्थित वरिष्ठ अतिथियों एवं विषय विशेषज्ञों ने अपने-अपने विषयों पर विस्तृत चर्चा कर प्रतिभागियों को मार्गदर्शन प्रदान किया।
1. डॉ. वीरेंद्र व्यास (निदेशक प्रशासन, म.प्र. जन अभियान परिषद्, भोपाल)
· मुख्य विषय : नर्मदा की अविरलता एवं निर्मलता हेतु जिला स्तर पर कार्ययोजना।
· महत्वपूर्ण बिंदु : उन्होंने नर्मदा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण पर गहन मार्गदर्शन देते हुए इसके लिए जिले में 'कब, कैसे, कहाँ और कौन' करेगा, इस विषय पर विस्तृत परिचर्चा की। उन्होंने सामूहिक प्रयासों को प्रभावी बनाने हेतु समन्वय पर विशेष जोर दिया।
2. शिव नारायण पटैल (प्रदेश सलाहकार, जन अभियान परिषद्)
· मुख्य विषय : नदी स्वास्थ्य एवं संवर्धन।
· महत्वपूर्ण बिंदु : उन्होंने नदियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए तटीय क्षेत्रों में सघन वृक्षारोपण तथा जल एवं पर्यावरण संरक्षण को रेखांकित किया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर चल रहे छोटे-छोटे प्रयासों को बड़े आंदोलन का आधार बताते हुए उनके महत्व पर प्रकाश डाला।
3 मनोज जोशी (क्षेत्र समन्वयक, नर्मदा समग्र)
· मुख्य विषय : नर्मदा परिक्रमा, नर्मदा पथ एवं जैविक कृषि।
· महत्वपूर्ण बिंदु : उन्होंने नर्मदा के जल-ग्रहण क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक कृषि के महत्व को विस्तार से समझाया। साथ ही, उन्होंने नदी के स्वास्थ्य के लिए मुख्य एवं सहायक नदियों में नालों के जल को मिलने से रोकने पर जोर देते हुए समूहवार चर्चा की।
4. महेंद्र कौरव (विषय विशेषज्ञ)
· मुख्य विषय : घाट संस्कृति एवं घाट संरक्षण।
· महत्वपूर्ण बिंदु : उन्होंने कहा कि नदी से मानव का सीधा संपर्क घाटों के माध्यम से होता है, जो हमारे आध्यात्मिक केंद्र हैं, लेकिन अब ये प्रदूषण के अड्डे बनते जा रहे हैं। उन्होंने आदर्श घाट की संकल्पना पर चर्चा करते हुए निम्न बिंदुओं पर कार्य करने की आवश्यकता बताई:
· मृदा कटाव से बचाव।
· दैनिक पूजन-अर्चन एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ।
· गीले एवं ठोस अपशिष्ट का उचित निपटान।
· मूर्तियों का समुचित विसर्जन एवं मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग।
· घाटों पर सूचना पटल की स्थापना।
· कच्चे एवं पक्के घाटों पर 'हरियाली चुनरी' यानी सघन वृक्षारोपण।
· सरकार को उपयोगी गतिविधियों से अवगत कराना।
समापन एवं आभार
कार्यक्रम के अंत में जिला समन्वयक घनश्याम रायपुरिया ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने माँ नर्मदा की निर्मलता, स्वच्छता एवं अविरलता बनाए रखने के लिए जन अभियान परिषद् द्वारा किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया तथा सभी से इस अभियान में निरंतर सहयोग का आग्रह किया।
प्रतिभागी एवं उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में जिले के विभिन्न विकासखंडों से नवांकुर, प्रस्फुटन और नर्मदा सेवा समितियों के कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से निम्न लोग उपस्थित रहे:
· विकासखण्ड समन्वयक : विवेक मिश्रा, विनायक राव बढ़नेरकर, सुश्री सोनिया सिंह।
· आचार्य युगल कृष्ण शास्त्री।
· म.प्र. मराठी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष संतोष गोडबोले।
· दैनिक नर्मदा आरती (गौरी घाट) के संयोजक ओंकार दुबे।
· मनीष कुलश्रेष्ठ, प्रशांत विष्पुते (वेणु पांडुरंग सेवा न्यास)।
· साथ ही नर्मदा समग्र के अन्य कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
