78 पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति निरस्त, विभागीय जांच या आपराधिक मामलों में फंसे - Bhaskar Crime

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78 पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति निरस्त, विभागीय जांच या आपराधिक मामलों में फंसे

*प्रमोशन के बावजूद नहीं मिली राहत: 78 पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति निरस्त*

विभागीय जांच या आपराधिक मामलों में फंसे अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जाएगा

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस में बड़े प्रशासनिक फैसले के तहत पुलिस मुख्यालय ने 78 निरीक्षकों (TI) को दी गई पदोन्नति वापस ले ली है। यह कार्रवाई 13 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश (क्रमांक पुमु/3/कामिक स-12/1006/2026) के तहत चयनित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच लंबित होने, दंड प्रभावी होने अथवा आपराधिक मामले न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण की गई है।

 किन्हें हुआ नुकसान

पुलिस मुख्यालय भोपाल से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन उप निरीक्षकों/कार्यवाहक निरीक्षकों को निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया था, उनमें से कई ऐसे हैं जिनके खिलाफ:

· दंड प्रभावशील है

· विभागीय जाँच लंबित है

· आपराधिक प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है

इन्हीं कारणों से संबंधित इकाई प्रमुखों (पुलिस अधीक्षकों) ने इन अधिकारियों को पदोन्नति वाले पद पर कार्यमुक्त नहीं किया और मुख्यालय को इसकी सूचना दी। इसके बाद ही पुलिस मुख्यालय ने यह कड़ा फैसला लिया।

आदेश का प्रभाव

· पदोन्नति पर रोक: संबंधित 78 अधिकारियों की पदोन्नति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई है।

· पूर्व पद पर यथावत: ये अधिकारी अपने पूर्ववत कार्यवाहक पद पर ही काम करते रहेंगे। उनके पद और जिम्मेदारियों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

· जिम्मेदारी: आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी पदोन्नत अधिकारी के खिलाफ जांच या मामला होने के बावजूद उसे कार्यमुक्त किया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित इकाई प्रमुख की होगी।

 अन्य पदोन्नति आदेश

गौरतलब है कि 13 जुलाई 2026 को ही पुलिस मुख्यालय ने 168 सूबेदारों एवं कार्यवाहक रक्षित निरीक्षकों को नियमित रक्षित निरीक्षक (RI) पद पर पदोन्नत करने के आदेश भी जारी किए थे। साथ ही, 383 निरीक्षकों को नियमित रूप से उप पुलिस अधीक्षक (DSP) पद पर पदोन्नत किया गया था।

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश ने साफ कर दिया है कि विभागीय जांच या आपराधिक मामलों में फंसे अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जाएगा।