कोर्ट से उतरकर पहुंचे मजिस्ट्रेट, गोसलपुर में बिना हेलमेट वालों की खैर नहीं - Bhaskar Crime

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कोर्ट से उतरकर पहुंचे मजिस्ट्रेट, गोसलपुर में बिना हेलमेट वालों की खैर नहीं

सड़क ही बन गई अदालत: कोर्ट से उतरकर पहुंचे मजिस्ट्रेट, गोसलपुर में बिना हेलमेट वालों की खैर नहीं

मजिस्ट्रेट ने सड़क पर उतरकर वाहन चालकों की फाइलें खंगालीं। उनके साथ थाना प्रभारी और पुलिस स्टाफ भी रहे 

विशेष रिपोर्टर क्राइम भास्कर न्यूज जबलपुर। आमतौर पर यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले चालक बड़े शहरों की चकाचौंध में चालान कटने से बच जाते हैं, लेकिन मंगलवार को कस्बा गोसलपुर में कानून की मुश्किलें इतनी बढ़ गईं कि वाहन चालकों को सड़क किनारे खड़े होकर 'मोबाइल कोर्ट' का सामना करना पड़ा। जी हां, जबलपुर की न्यायपालिका ने अपनी चारदीवारी छोड़ी और सीधे जमीनी स्तर पर यातायात उतार दिया।

कैसे बनी सड़क कचहरी

माननीय प्रधान जिला एवं सेशन न्यायाधीश के कड़े निर्देश और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर 'चलित न्यायालय' (Mobile Court) का यह दूसरा रूप गोसलपुर थाना क्षेत्र में देखने को मिला। न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती खालिदा तनवीर खान और श्री विशाल रिछारिया ने सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं की, बल्कि खुद सड़क पर उतरकर वाहन चालकों की फाइलें खंगालीं। उनके साथ गोहलपुर थाना प्रभारी श्रीमती भावना तिवारी का पुलिस स्टाफ भी मुस्तैद नजर आया।

'नामी-गिरामी' गाड़ियों पर भी गाज

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जब गोसलपुर के मुख्य चौराहे/मार्ग पर घेराबंदी की तो हड़कंप मच गया। इसमें किसी को बख्शा नहीं गया—चाहे महंगी चारपहिया गाड़ी हो या छोटा दोपहिया वाहन। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत तुरंत चालानी कार्रवाई की गई। मजिस्ट्रेट ने सख्ती दिखाते हुए बिना हेलमेट, बिना डॉक्यूमेंट और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों को मौके पर ही चालान काटकर चेतावनी दी।

सिर्फ जुर्माना नहीं, 'सबक' भी

इस चलित न्यायालय की सबसे बड़ी खासियत रही कि वहां सिर्फ पेनाल्टी (जुर्माना) नहीं कटा, बल्कि वाहन चालकों व मालिकों को "मुनासिब समझाइश और हिदायतें" भी दी गईं। अधिकारियों ने चालकों को साफ-साफ कहा:

"हेलमेट सिर पर रखना नहीं, बांधना होता है—यह आपकी जान का कवच है। जरूरी दस्तावेज गाड़ी में होने चाहिए, न कि घर की अलमारी में। पांच सेकंड की लापरवाही सड़क पर मौत का कारण बन सकती है।"

आमतौर पर चालान काटने की कार्रवाई सिर्फ ट्रैफिक पुलिस करती है, लेकिन इस बार न्यायिक मजिस्ट्रेट खुद मौजूद थे। इसका मतलब था कि अगर कोई चालक बहस या उल्टा-सीधा बोलता, तो उसे सीधे कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता—क्योंकि 'जज' सामने थे। इस कदम का उद्देश्य लोगों के मन में यह डर बैठाना था कि अब यातायात नियमों की अनदेखी सामान्य बात नहीं रह गई है, बल्कि यह सीधा कानूनी अपराध है।

पुलिस और न्यायिक अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह कार्रवाई सिर्फ एक बार की खबर नहीं है, बल्कि जिले के दूसरे क्षेत्रों में भी इसी तरह के चलित न्यायालय लगाए जाएंगे। इस मुहिम का मूल उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और लोगों को जागरूक करना है, ताकि भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके। अब गोसलपुर के वाहन चालकों के लिए सड़क चौड़ी नहीं, बल्कि कानून सख्त हो गया है!